Hindi Quotes hindi me suvichar

नमस्कार साथियों आज इस लेख में हम प्रसिद्ध हस्तियों के द्वारा कही गई कुछ रोचक Quots के बारे में पढेंगे , जिससे हमारे जीवन को नई दिशा मिलेगी  । आशा करता हूँ , कि यह लेख आपको पसंद आयेंगे ।अपने बहुमूल्य विचार हमें कॉमेंट करके जरूर बतायें ।
” बड़ी-बड़ी महत्वाकांक्षाएँ रखने से छोटी-छोटी इच्छाएं स्वमेव पूरी हो जाती है , पर छोटी-छोटी इच्छाएँ रखने से उनकी पूर्ति भी कठिन हो जाती है । “
थॉमस जैफरसन
” मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं , अपितु परिस्थितियां ही मनुष्य की दास  हैं ।”
डिजरायली
” यदि परिस्थितियां अनुकूल ना रहे , तो ईश्वर को दोष मत दो अपना ही निरीक्षण करो । यदि जरा गहराई से सोचोगे तो तुम्हें स्वयं अपनी कठिनाइयों के कारण मालूम हो जाएंगे ।”
एनन
 ” दूसरों की परिस्थितियां हमें सुंदर प्रतीत होती हैं , जबकि दूसरों को हमारी परिस्थितियां सुंदर प्रतीत  होती हैं । “
साइरस
” महान की उपासना करना , स्वयं महान होने के बराबर है । ” श्रीमती नेकर
 ” जीवन में वास्तविक असफलता एक ही है और वह यह कि मनुष्य जिस बात को जिस रुप में जानता है उसी में तल्लीन न  रहे । “
केनन फेरर
 ” अपने सुधार के बिना परिस्थितियां नहीं सुधर सकती । अपना दृष्टिकोण बदले बिना जीवन की गतिविधियां नहीं बदली जा सकती  । इस तथ्य को मनुष्य जितनी जल्दी समझ ले , उतना ही अच्छा है । “
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
  ” महत्वाकांक्षी बनो और उसकी कोई सीमा न होने दो । अकर्मण्यता के जीवन से यशस्वी जीवन और मृत्यु अधिक अच्छी है । “
सर सी. वी. रमन
 ” बहुत सी तथा बड़ी गलतियाँ  किये बिना  , कोई मनुष्य बड़ा और महान नहीं बन सकता । “
ग्लैडस्टन
 ” यदि कोई मनुष्य अप्रसन्न है , तो यह उसी का दोष है ‘  क्योंकि ईश्वर ने तो सभी को प्रसन्न बनाया है  । “
इपिक्टेटस
 ” जो दूसरों पर शासन करना चाहता है , पहले उसे स्वयं पर शासन करना चाहिए । “
मैसिंगर
 ” शांत रहो और धैर्य रखो , तुम प्रत्येक पर शासन कर सकते हो । “
सेंट जस्ट
” वास्तविक गौरव आत्म विजय से उत्पन्न होता है , अन्यथा विजेता होकर भी विजित ही रहोगे । “
थॉमसन
 ” जिस समय क्रोध उत्पन्न होने वाला हो , उस समय उसके परिणामों  पर विचार करो । “
कन्फ्यूसियस
 ” संपूर्ण संसार को एकता के सूत्र में बांधने की योजनाएं बनाना सरल है , किंतु अपने हृदय में रहने वाले क्रोध पर विजय पाना अत्यंत कठिन है । “
आचार्य विनोबा भावे
 ” मात्र एक आवेश पूर्ण बात से परिवार में , आस पड़ोस में , राष्ट्र में झगड़ा पैदा हो सकता है और हुआ भी है  । संसार में भी जितने संघर्ष छिड़े हैं  , उनमें से आधे तो कुवचन के कारण ही हुए हैं । “
जेम्स बोल्टन
” स्त्रियों के रोने धोने का आधा भाग अस्तित्व में ही ना आए , यदि व्यर्थ की बातें , जिन्हें वे स्वयं व्यर्थ मानती हैं ,मुंह से ना निकालें । कई बार तो ऐसी बातें ना कहने का संकल्प भी कर बैठती हैं , परंतु फिर भी कह बैठती हैं । “
जॉर्ज इलियट
” सांप्रदायिक नेता वही अच्छा है ,जो अपने उपदेश पर स्वयं आचरण करता हो । “
शेक्सपियर
” लड़ाई – झगड़े संसार में होते ही रहते हैं , किंतु सदा के लिए मन तोड़ बैठना या संबंध विच्छेद कर लेना बहुत ही बुरा है । “
डगलस जेरॉल्ड
काबू में रखें – प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को,
काबू में रखें – खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें – किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें – महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को,
काबू में रखें – पराया धन देखें तो लालच को, 
भूल जाएं – अपनी नेकियों को,
भूल जाएं – दूसरों की गलतियों को,
भूल जाएं – अतीत के कड़वे संस्मरणों को,
छोड दें – दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें – दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें – दूसरों के धन की चाह रखना,
छोड दें – दूसरों की चुगली करना,
छोड दें – दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
 ” यदि आपके पर्स में पैसे हैं ,और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं , जहाँ आप जाना चाहते हैं
तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं । “
 ” यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं ,
तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुशनसीब हैं , जो इस हफ्ते भी जी न पायें । “
 ” जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं ,
बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों में है । “
                 ”  अगर कोई पूछे कि जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ? …… तो बेशक कहना, जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी और जो भी पाया वो प्रभू की मेहेरबानी थी। क्या खुबसूरत रिश्ता है मेरे और मेरे भगवान के बीच में, ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नहीं…”
 ☄जीवन के तीन मंत्र☄
☄ *आनंद में  –  वचन मत दीजिये*
☄ *क्रोध में  –  उत्तर मत दीजिये*
☄ *दुःख में  –  निर्णय मत लीजिय ,
                    ” कद इतना छोटा रखिए कि , सभी आपके साथ बैठ सकें। और इतना बड़ा मन रखिए कि , जब आप खड़े हो जाऐं, तो कोई बैठा न रह सके। “
                   ”  झाड़ू जब तक एक सूत्र में बँधी होती है, तब तक वह “कचरा” साफ करती है। लेकिन वही झाड़ू जब बिखर जाती है, तो खुद कचरा हो जाती है। “
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