धरती पुत्र किसान NEW HINDI KAVITA 2018

 

भरी दुपहरी जेठ की गर्मी , संकट बनकर चमके बिजली ,

अकड़न भरी हो पूस की रातें , हो चाहे अनहोनी बातें ।

 हर पल – हर क्षण में वसुधा का , गढ़ता नूतन परिधान,

 मेहनत की प्रतिमूर्ति जगत में , धरती पुत्र किसान ।।

बंजर धरती का यक्ष प्रश्न , अपने हल से हल करता है ,

 मिट्टी को मां का दर्जा दे , सबका पोषण करता है ।

 लहू – पसीना सींच धरा को , गढ़ता सुंदर गुलिस्तां ,

मेहनत की प्रतिमूर्ति जगत में , धरती पुत्र किसान।।

 खड़ी फसल लहराती जब है , तब मन को यह भाती है ,

बनकर बेटा नौजवान यह , कितनी उम्मीद जगाती है ।

कहीं लाभ या फिर हानि , ना टूटा मन का अरमान 

मेहनत की प्रतिमूर्ति जगत में , धरती पुत्र किसान ।।

 बड़ी वेदना मन के भीतर , गहरी है चिंता की खाई ,

खेत है गिरवी , सयानी बेटी , संकट में बेटे की पढ़ाई ,

लाल, मुंशी, मियां ,बनिया, सब के कर्ज तले परेशान,

मेहनत की प्रतिमूर्ति जगत में , धरती पुत्र किसान ।।

बनें सुर्खियां कभी अखबारों की , कभी राजनीति का हिस्सा,

घर – कपड़ों को कौन कहे , कल के भोजन की है चिंता ।

मानव पहुंच गया मंगल पर , पर भी फसलें ताके आसमान ,

मेहनत की प्रतिमूर्ति जगत में , धरती पुत्र किसान ।।

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