सोने का फल

बहुत पहले की बात है ,एक छोटा सा गांव था, उस गांव के लोग खेती किसानी का काम करते थे । जिनके पास खेत नहीं होता था , वे भेड़ ,बकरी और गाय -भैंस चराने का काम करते थें ।  दूध ,दही , गोबर और कंडे बेचकर वे अपना गुजर बसर करते थे । उसी गांव में सुखराम नाम का आदमी रहता था , उसके पास खेत नहीं था । उसके पास बहुत सारी बकरियां थी , हरदिन वो उन्हें जंगलों में ले जाकर चराता था , और शाम होने पर अपने गांव लौट अाता था । बकरियां जंगल में जाकर , हरे-हरे पत्ते और घास को खाकर उछल-कूद करते हुए घर को लौट आती थी । 1 दिन की बात है , सुखराम अपनी बकरियों को लेकर जंगल में बहुत दूर निकल गया जेठ का महीना था । सूर्य की किरणें आग की तरह तप रही थी , गर्मी के कारण बहुत धुल उड़ रही थीं । जमीन भी कोयले की अंगारों जैसा प्रतीत हो रहा था । उसके आसपास पानी का कोई स्त्रोत नहीं था , सुखराम को बहुत प्यास लग रही थी । सुखराम प्यास के कारण  वही एक पेड़ के नीचे तड़पने लगा ।  बकरियां उसी के आसपास फैल कर चरने लगी , कुछ समय पश्चात भगवान श्री शंकर महादेव वहां पर आए और उन्होंने सुखराम को प्यार से तड़पते हुए देखा । भगवान श्री शंकर ने एक ऋषि का वेश धारण किया और अपने हाथ के कमंडल में पानी लेकर उसके पास पहुंच गए ।ऋषि ने पूछा क्यों सुखराम तुम क्यों तड़प रहे हो  ? सुखराम ने कहा – क्या बताऊं महाराज प्यास के मारे मेरे प्राण निकल रहे हैं । भगवान शंकर को उस पर दया आ गई , उन्होंने अपनी कमंडल का पानी सुखराम को पीने के लिए दिया और अपनी थैले से निकालकर कुछ फल सुखराम को खाने के लिए दे दिया । सुखराम ने कुछ फल खाया और पानी पिया । सुखराम का मन शांत हुआ और उसने बचा हुआ फल अपनी पोटली में रख दिया । दिन भर में थका हुआ सुखराम साँझ होने पर घर को लौटने लगा । घर लौटने पर उसने अपनी पत्नी सुखिया से बातचीत की और बचा हुआ फल रसोईघर के पाट के ऊपर रख दिया । रात में खाना खाने के बाद वह लोग सो गए , सुबह अगले दिन मुर्गे की बांग के साथ उसका नींद खुल गया । हाथ मुंह धो कर सुखराम रसोईघर में गया और पाट में रखे हुए फल को देखा । फल को देखकर वह सन्न रह गया साधु के दिए हुए फल सोने के बन गए थे , उसने उस फल को चुपचाप कपड़े में लपेट कर और बकरियों को लेकर जंगल की ओर चला गया । सुखराम मन ही मन बहुत बहुत गदगद हो रहा था , लेकिन कभी-कभी उसके चेहरे पर डर के भाव भी दिखाई दे रहे थे । दिनभर बीतने के बाद शाम को वह फिर घर आया । उसके बाद खाना खाकर सो गया , लेकिन रात भर उसे नींद नहीं आई । दूसरे दिन सुबह – सुबह ही वह उठ गया और अपनी पत्नी को कहा कि आज मुझे शहर में कुछ काम है ।  मैं आज जंगल में बकरी चराने नहीं जाऊंगा , आज तुम चली जाना । सुखिया ने जल्दी –  जल्दी घर का काम किया खाना खाया और बकरियों को लेकर जंगल की ओर निकल गई । सुखराम भी अपनी पोटली पकड़कर शहर की तरफ चला गया । शहर में पहुंचने के बाद सुखराम जल्दी-जल्दी एक सुनार के दुकान पर पहुंचा और उसने अपनी पोटली से सोने का फल निकालते हुए सुनार को दिया । सुनार चमचमाते सोने के फल को देखकर चकित रह गया । उसके मन में लालच आने लगा उसने पूछा इसे तौलना है क्या ? सुखराम ने झट से कहा – हां भैया इसे जल्दी से तौल दो और मुझे पैसा दे दो । सोनार ने सोने के फल को तराजू पर रखा और उसे रुपयों की गड्डी थमा दी । सुखराम ने कुछ भी सवाल जवाब नहीं किया और उल्टे पांव अपने घर वापस आ गया । इतने सोने की कम भाव देकर सुनार बहुत खुश हुआ और उसने सुखराम को कहा कि मेरे पास दोबारा जरूर आना , मैं पूरे शहर में तुमको सबसे अच्छा भाव दूंगा । सुखराम ने घर आकर सारी बात अपनी पत्नी सुखिया को बताई और रुपयों को गड्डी उसके हाथों पर रख दी । उसके बाद उन्होंने अपने घर के लिए नए-नए बर्तन खरीदें , नए कपड़े खरीदी , सुखिया ने अपने लिए बहुत से महंगे – महंगे जेवर  खरीदी । बहुत सारी बकरियां खरीदी और कुछ दिनों में उन्होंने अपने लिए एक बड़ा सा सुंदर घर बनवा लिया , उनकी इस अमीरी को देखकर गांव में चर्चा होने लगी कि यह लोग कुछ ही दिनों में इतने अमीर कैसे हो गए । दोनों बहुत बोले थे उन्होंने लोगों के बार बार पूछने पर बता दिया तथा अपनी सच्चाई को साबित करने के लिए वह सोने का फल भी लोगों को दिखा दिया । एक दिन उनके घर पर चार लोग आए और उन्होंने कहा हमने आपके बारे में बहुत कुछ सुना है ,क्या आप लोग सच बोल रहे हैं ? हम वो सोने का फल देखना चाहते हैं । क्या आप जो कह रहे हैं ,  वह वाकई सच है ? सीधे – साधे सुखराम ने उन चारों को सोने का फल दिखाकर पूरी कहानी बता दी । उसी रात  को उनके घर में चोर घुस आए , उन्होंने सुखराम के सोने के फल को चुरा लिया लेकिन खटपट की आवाज होने पर सुखराम की नींद खुल गई और उन्होंने उन चोरों को पहचान लिया , कि यह वही लोग है जो सुबह फल के बारे में पूछने के लिए आए थे । गांव में सुखराम के घर चोरी होने का हल्ला मच गया था । सुखराम सुबह-सुबह ही पंचायत में पहुंच गया और उसने सारी बात बता दी पंचायत ने उन चारों लोगों को बुलाया और पूछा कि क्या तुमने सुखराम के सोने का फल चुराया है  ? उन लोगों ने चोरी करने की बात स्वीकार नहीं की लेकिन पंचों के धमकाने के बाद वे डर गए और उन्होंने चोरी करने की सारी बात पंचायत के सामने कबूल कर ली । चोरों को चोरी किया हुआ फल लाने के लिए कहा गया उनमें से एक गया और छुपाया हुआ सोने का फल पोटली सहित लेकर आ गया । पंचों ने उस पोटली को खोल के देखा तो उसमें कच्चे फल थे । यह देखकर सभी आश्चर्यचकित हो गए । उन फलों को सुखराम को वापस कर दिया गया और चोरों को गांव से बाहर निकाल दिया गया । सुखराम वह फल देखकर निराश हुआ और अपनी पत्नी के साथ घर वापस आ गया , उसने वह फल वापस रसोईघर के पाट के ऊपर रख दिया । लेकिन यह क्या,  वह फल फिर से चमचमाते हुए सोने के फल में बदल गए यह देखकर सुखराम और सुखिया बहुत खुश हो गए और खुशी से नाचने लगे ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.