छत्तीसगढ़ के परब सवनाही

                       //  सवनाही //

रिमझिम पानी के बून्द परे ले धरती नवा रूप के सिरजन होथे। तरिया, डबरी नदिया नरवा के कलकलात रूप,मेचका झिंगरा के रतिहा संगीत के सङ्गे संग घुरूर घरर बादर ,चम चम बिजरी घुमड़त बरखा म सिरतोन धरती के नवा रूप मन ल भाथे ।ये रूप ह रूख राई ,परानी सबो के मन म उछाह भरथे।सावन महीना ले इही उछाह ह मनखे के आने आने भाव संग रीत अउ परब बन जाथे।किसान धरती के सेवा बजात अपन जिनगी बर इही तीज तिहार म कामना करथे अउ मेहनत के बीच जांगर ल अराम देथे।

   छत्तीसगढ़ के माटी परब तिहार अउ मनौती के माटी आय।इहा सब के सुनता सुमत अउ खुशाली बर कतकोन उदिम ले सिरजन होथय।गांव के भुइया म शक्तिपीठ के रूप म शीतला, भूमियरिंन,भईसासुर ,सतबहिनी, राउतराय,लिंगो, संहड़ा गउरागुड़ी असन कतको ठउर रथे जिकर पूजापाठ अउ मनोउती ले मनखे के मन म धीरज आथे।गांव के पूजारी जेल बईगा कथे हुम् धूप अउ पूजा- पाठ ले गांव म कोनो बिपदा झन होव एकर कामना करथय।

*कब मनाथे*

रथदुज के बाद आषाढ़ के आखिरी नही त सावन के पहिली इतवार के दिन सवनाही मनाये के चलन हावय।सवनाही म गांव के काम काज बन्द रहिथे अउ  बईगा ह पूजा- पाठ करके सब देवी देवता के सुमिरन कर के गांव के धन -जन बर  मनउती मांगत गांव के खल्हउस (उतार) म सवनाही  रेगांथे। नान्हे नांगर गड़िया के निम्बू, बन्दन,नरियर,हुम् धूप,धजा, फीता, कारी कूकरी ,मरकी ,मन्द, पूजा समान के रूप म रथे।

पूजा म फोड़े नरियर ल पूजा म शामिल मनखे मन परसादी पाथे।गांव के सिमा ले बाहिर कूकरी ल छोड़थे।अउ एला पाछु लहुट के नई देखय।गांव ल भूत, प्रेत जादू टोना ले बचाय के उदिम करें जाथे।

*तिहार के पाछु कारण*

मनखे मन मानथय सावन महीना के सिमसीमात दिन बादर म जादू- टोना के प्रकोप बढ़ जाथे।जिकर ले गांव के सुरक्षा, रोग राई ले बचाव, मनखे के संग-संग गरु गाय, खेती- बारी के सुरक्षा के भाव एमा रहिथे। गांव- गांव म घर के मोहाटी कोठ म जादू टोना ले बचें बर गोबर के पुतरी (सवनाही)बनाथय। कहे जाय त धरती म आए बदलाव बर मनखे ल मानसिक रूप ले तैयार करे के भाव ए तिहार म होथे।नवा जग म कतकोन परिवर्तन होवत है ,फेर गांव के गुड़ी  चउपाल ह हमर परब ल सिरजा के रखे हे।

*सवनाही अउ इतवारी तिहार*

खेती किसानी म भुलाये मनखे ल आराम कहाँ…!इही सवनाही तिहार के दिन ले किसानी के काम म भुलाये जांगर तोड़ कमईया किसान बर हफ्ता म एक दिन इतवार के छूट्टी रखे जाथे। जेहा दशेरा के आवत के चलथे।ये दिन म माईमन घर अंगना के जतन ,कपड़ा लत्ता के सफाई,चाउर दार के बूता ल करथे त बाबू मन गांव के गुड़ी म सकलाक़े सियानी गंवारी के गोठ करत समस्या निपटाय के उदिम करथे। गांव के रामधुनी,रमायन के कार्यक्रम घला मनोरंजन करथे।

हमर ये परब ल भला हमन कुरुति मानथन फेर हमर पुरखा मन ह बिग्यान के जानकार रहिस।अउ उकर उही ज्ञान के दरसन ह हमर रीत परब म होथे।

धरती म आय बदलाव ले ए मौसम म रोग राई, जर जुड़ बढ़ जाथे ।

 गुंगुर धूप ल घर म गुंगवाथे हमन भला जादु टोना के रुप म मानथन फेर जीवाणुनाशी के रूप म एला बउरथे । तीज तिहार म रोटी पीठा मेहनत कस जिनगी म पोषण के पुरती करथे।

हमर ये रीत परब मन हमर चिन्हारी आय जे हर माटी अउ धरती के रूप ले जुड़े हावय।