हार कहाँ हमने मानी है


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हार कहाँ हमने मानी है
राष्ट्र के संघर्ष पर निरन्तर पथगामी है
हर मुश्किल से लड़कर लिखते नई कहानी है
संघर्ष रत है हम, हार कहाँ हमने मानी है

चली ये कैसी झकझोर हवा तूफानी है
जन्म लिया जहाँ कोरोना, की उसने मनमानी है
कोरोना अभिशाप बना हमारे लिए, हुई हैवानी है
समय रहते स्थिति भांपा, भारत की बुद्धिमानी है
भारत की सूझबूझ देख , हुई जग को हैरानी है
मिट जाएगा नामोनिशान रार उनसे अब ठानी है
है जोर कितना हममें, ये दुनिया को दिखलानी है
हार कहाँ हमने मानी है

कोरोना ने कैसा तांडव नाच नचाया
सारा संसार अब इनसे है घबराया
बला क्या है ये कोई समझ न पाया
कारखाना मीलो में भी, ताला जड़ा
लॉक डाउन कर घर में रहना पड़ा
पर कोरोना से लड़ने की,हमने ठानी है
सम्पन देश भी जहाँ, मांग रहा पानी है
हार कहाँ हमने मानी है

जब-जब देश में संकट का बादल छाया
मिलकर हमने है उसे हराया
वर्षो से बंधी गुलामी की जंजीरे तोड़े
आँख दिखाये दुश्मनो ने तो, उनके भी मुँह मोड़े
कितने प्रलय हुए इस भूमि पर
कभी धरा भूकम्प से कंपकंपा उठी
कभी जलजला से कितने आशीयाने बहे
सब कष्टो को है हमने सहे
हर मुसीबत में एक बात दुनिया ने जानी है
हार कहाँ हमने मानी है

बेघर न हो कोई , न पड़े खाने के लाले
इसकी भी राह , हमने हैं निकाले
हर संकट से अब, मिलकर पार लगानी है
मायूस पड़े चेहरों पर ,मुस्कान फिर खिलानी है
नई दिवस की नई सुबह, फिर हमें लानी है
विश्व गुरु बनके, राह फिर दिखानी है
हार कहाँ हमने मानी है !