राष्ट्रीय खेल दिवस

राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं….
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खेल दिवस के दिन बच्चों को
हॉकी का दिखलाया डंडा
क्या है कैसे खेले गुरुवर
समझ न आया उनको फंडा
कौन ध्यानचन्द औऱ सरदारा
टी वी पर तो कभी न आया
धोनी,कोहली सचिन कपिल
सा कोई न हॉकी का दिख पाया
गली मोहल्ले से नगरों तक
जब बल्ले,गेंद की धूम मची
तभी बताओ गुरुजी तुम
हॉकी राष्ट्रीय खेल कैसी
सच मे प्रश्न सटीक पाकर
मैं डूब गया हूं चिंतन में
राष्ट्र का प्रतीक हॉकी ही
क्यों गुमनाम सा है
अपने वतन में…

कविता की अभिलाषा

विश्व कविता दिवस की शुभकामनाएं

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चाह नही मैं चारण पद हो
नृप का गौरव गुण गाऊ
चाह नही मैं श्रृंगारित हो,
प्रेयसी का मन बहलाऊँ
चाह नहीं मैं पात्र हंसी का
बनकर अट्ठहास लगवाऊ
चाह नही मैं देवों की आरती हो
अंधभक्ति दिखलाऊँ
चाह नही मैं राजनीति के कीचड़ से
खुद पर दाग लगाऊँ

शोषित पीड़ित मानवता की
सेवा का हो राग जहाँ
लहू बहाकर मातृभूमि की
रक्षा में हो त्याग जहाँ
आँसू क्रंदन देश प्रेम तुम
लेकर वर्णों का आकार
संयोजित हो रूप कविता का
कर देना मेरा स्वप्न साकार ।।

बादर लबरा होगे

Beautiful cloud

*बादर लबरा होगे…*
अब असाढ़ ले सावन आथे
तरिया नदिया सबो सुखागे
तोर अगोरा म बइठे हन सब
बिन पानी सरी बुध छरियागे
जीव जिनावर तड़पे लागे
जोते खेत करवाही गड़थे
तीप के गोड़ के भोमरा होगे
लागत हे बादर लबरा होगे

तात तात लागे भिनसरहा
घाम घरी कस सुरुज ह पेरहा
अब्बड़ आस ले नजर गडाहे
भंडार बरसही सोच किसनहा
छोल चाँच तैयार खेत ह
बाट जोहत तैयार नगरिहा
आही बरोडा फेर उड़ाही
छाये बादर कबरा होगे
लागत हे एसो बादर लबरा होगे….

माँ भारती के लाडले को नमन


हे प्रनतपाल हे कर्मवीर
है तुंग पुरुष हे महावीर
प्रतिहारी सीमाओं के प्रखर
बन खड़े हिन्द के दृढ़ प्राचीर

सौजन्य :-pixabay.com



गौरव इस मिट्टी का तुमसे
उत्तुंग इरादों के धानी
तुमसे भारत का विश्व गान
निज देश प्रेम के अभिमानी



हिमगिरि की चोटी विशाल
धरती या फिर हो पाताल
निज शौर्य पराक्रम के दम
न झुका कभी भारत का भाल



बन पवन दूत बरसाया अनल
आतंकी लंका में विनाश
अब लोहा माने सकल विश्व
कर दो नापको का सर्वनाश



जन-जन का मन हो अधीर
करती पुकार हे तरुण वीर
उठे आंख जो बुरी नियत
नरसिह रूप ले छाती चीर



गर गिरे शहीदी लहू बून्द
वह रक्तबीज हो जायेगा
हर युवा हिन्द के खातिर
हँसकर अर्पित हो जाएगा ।।

Holi kavita। होली पर हिंदी कविता

रंगों के महापर्व होली की शुभकामनाएं….

सौजन्य :-pixabay.com

होली लाये प्रेम का,सन्देशा जन मन भरे
हर्षित मन झूमें, लगे मधुमास हो
धरती के सारे रंग,भाव बन सजे ऐसे
जैसे इस बार होली,अपनी ही खास हो..

लाल लगे माथे,शौर्य का प्रतीक बन
पौरुष पराक्रम ,विजय श्री भाल हो
केसरिया त्याग का सन्देशा,जग जन को दे
संयम वैराग्य तप,अपने ये ढाल हो
धरती की अंगड़ाई,हरे की हरियाली फैले
लहराये तृण-तृण,वसुधा का साज हो…

सौजन्य :-pixabay.com

विद्या का प्रकाश फैल,तिमिर अशिक्षा का हरे
चहुँओर ज्ञान पीले, रंग का पैगाम हो
नीले सज पुरुषार्थ,मान बढ़ जाये
विश्व गुरु फिर अपना, हिंदुस्तान हो…..

श्वेत सजे मन की ,पवित्रता का भाव लेके
चहुँओर शांति,स्वच्छता सद्भाव हो
रंग सारे मिल जाये,दूर हो विषमताएं
विश्वशांति,सद्भाव का,पूरा अब अरमान हो…..