शब्द ही सुर शुलभ मेरा

शब्द ही सुर सुलभ मेरा
शब्द ही साज है मेरा।
अर्चना शब्द की करता
यही अंदाज है मेरा।।
शब्द आधार है मेरा
शब्द ही प्यार है मेरा।
अर्चना शब्द की करता
शब्द ही संसार है मेरा।।
शब्द को साधना दुष्कर
शब्द की साधना दुष्कर
शब्द स्वरूप केहरी का
शब्द को बांधना दुष्कर
कठिन है शब्द में रमना
कठिन ले शब्द को थमना
शब्द संसार में कितना
दुष्कर शब्द ले चलना

लेना चाहूं नाम हरि का


🙏🙏श्री हरि:🙏🙏

लेना चाहूं नाम हरि का
स्त्रोत :-google image

लेना चाहूं, नाम श्री का,
कैसे ले लूं, नाम हरि: का,
प्रभु नाम में, बहुत वजन है,
उठाने वजन, तैयार होना है।

सबसे पहले, देंगे परीक्षा,
उसमें उत्तर, गुरु की शिक्षा,
मन वचनों से, देते परीक्षा,
गुरु कृपा से, सफल परीक्षा।

उठाना वजन, अब सरल हो गया,
प्रभु की शरण का, मार्ग खुल गया,
मन में प्रभु का, वास हो गया,
सदा के लिए उनका, दास हो गया।

सौंप दें प्रभु को, अपना जीवन,
सौंप दिया जैसे, द्रोपदी जी ने,
सौंप दिया जैसे, प्रहलाद जी ने,
करते सदा रक्षा, ‘ कृपा निधान’ ।

हरि: बोल, हरि: बोल, हरि: बोल, हरि: बोल
हरि: हरि: हरि: हरि: बोल –
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे

Holi kavita। होली पर हिंदी कविता

रंगों के महापर्व होली की शुभकामनाएं….

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होली लाये प्रेम का,सन्देशा जन मन भरे
हर्षित मन झूमें, लगे मधुमास हो
धरती के सारे रंग,भाव बन सजे ऐसे
जैसे इस बार होली,अपनी ही खास हो..

लाल लगे माथे,शौर्य का प्रतीक बन
पौरुष पराक्रम ,विजय श्री भाल हो
केसरिया त्याग का सन्देशा,जग जन को दे
संयम वैराग्य तप,अपने ये ढाल हो
धरती की अंगड़ाई,हरे की हरियाली फैले
लहराये तृण-तृण,वसुधा का साज हो…

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विद्या का प्रकाश फैल,तिमिर अशिक्षा का हरे
चहुँओर ज्ञान पीले, रंग का पैगाम हो
नीले सज पुरुषार्थ,मान बढ़ जाये
विश्व गुरु फिर अपना, हिंदुस्तान हो…..

श्वेत सजे मन की ,पवित्रता का भाव लेके
चहुँओर शांति,स्वच्छता सद्भाव हो
रंग सारे मिल जाये,दूर हो विषमताएं
विश्वशांति,सद्भाव का,पूरा अब अरमान हो…..

   

चलो मानवता के लिए एक दीप जलाये


दीप जले
अंधकार चीरकर
मन की पीड़ा दूरकर
उल्लसित मन
सुमन तरंग
ज्योतिर्मय जग में
भीनी सुगन्ध
दीप जले ,दीप जले!
अलसाई खेतों में
मेहनत का प्रतिफल हो
बंगले की आभा से
झोपड़िया रोशन हो
मानवता सजोर रहे
हिन्दू न मुस्लिम हो
माटी का नन्हा लोंदा
हाथों में साथ बढे
दीप जले, दीप जले!
घर की खिचडिया सही
भले न पकवान बने
तरसे न बचपन फिर
भूख न शैतान बने
नन्ही सी बिटिया की
आभा न आंच आये
खुशीयो को अपनी
दूजा न रो पाए
दीप जले,दीप जले!
बम और लरियो की
इतनी न धमाके हो
उजड़े न घर बार कोई
अपनो की यादें हो
सरहद सुकून मिले
अमन का बिसाते हो
हाथ बढ़े, गले मिले
दीप जले, दीप जले!
सहमी सी धरती में
अपनों का क्यो रोना
जीत जाए मानवता
हारे अब कोरोना
चिंतन मन सद्प्रयास
जन मन का साथ मिले
दीप जले-दीप जले…

शहीदों को नमन

नक्सली हमले में शहीद देशभक्तों को विनम्र श्रद्धांजलि,


कहीं टिटकता घोड़ा रूठा, कहीं रेशम का धागा
कहीं टूटा बुढ़ापे का लाठी,कहीं सुहाग विधाता
किसी मित्र ने साथी खोया,कहीं किसी ने भ्राता
दुख का अंत कहाँ रिश्तों में ,ससुर हुए बिन जमाता
मचा तबाही फिर दुष्टो की ,नक्सलमयि अंजाम
दण्डक वन की पीड़ा हरने,फिर आओ श्रीराम।।

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मानव ही मानव को छलते है,असन्तोष फिर छाये
तनिक स्वार्थ के चलते हमने,अनगित प्राण गंवाये
उजड़े-उजड़े घर बार यहाँ, खुद को खुद ही तलाश रहे
जल जंगल जमी हमारी ,फिरभी टुकड़ो को ताक रहे
भोली भाली वा-नर सेना का ,यह विकृत अंजाम
दण्डक वन की पीड़ा हरने,फिर आओ श्रीराम।।

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खर दूषणमयि आतंकों से, वनांचल आजाद करो
मरीचि छद्मवेश से ,अब तो पर्दाफाश करो
नुक्ताचीनी राजनीति ने, अब तक बंदरबाट किया
राम राज्य की मूल मंत्र से,धरती और आकाश भरो
जन-जन की अभिलाषाओं के एकमात्र तुम धाम
दण्डक वन की पीड़ा हरने,फिर आओ श्री राम।।