बादर लबरा होगे

Beautiful cloud

*बादर लबरा होगे…*
अब असाढ़ ले सावन आथे
तरिया नदिया सबो सुखागे
तोर अगोरा म बइठे हन सब
बिन पानी सरी बुध छरियागे
जीव जिनावर तड़पे लागे
जोते खेत करवाही गड़थे
तीप के गोड़ के भोमरा होगे
लागत हे बादर लबरा होगे

तात तात लागे भिनसरहा
घाम घरी कस सुरुज ह पेरहा
अब्बड़ आस ले नजर गडाहे
भंडार बरसही सोच किसनहा
छोल चाँच तैयार खेत ह
बाट जोहत तैयार नगरिहा
आही बरोडा फेर उड़ाही
छाये बादर कबरा होगे
लागत हे एसो बादर लबरा होगे….

“मैं भारत के माटी अव”छत्तीसगढ़ी कविता

मैं भारत के माटी अव
मैं भारत के माटी अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव ।
भगत सिंह ,आजाद ,गुरु अउ
बेटी लक्ष्मी के धानी अव
जीवन त्याग करईया गांधी
अउ सुभाष के बानी अव।।

मैं भारत के माटी अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव
रात दिन मोर सेवा करईया
फउजी पुलिस के दाई अव
कारगिल म जेन खून बहिस
में उहि खून के लाली अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव ।।

जम्मों झन के पेट भरइया
हलधर के संगवारी अव
भूख पियास में काम करइया
मैं गरीब के थारी अव
मैं भारत के माटी अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत की माटी अव ।।

मोर मान सनमान के खातिर
जेन जिनगी ल गंवाए हे
मोर सेवा के रज के खातिर
जेन जिनगी ल खपाए हे
उहि मयारूक बेटा मन के
मैं सुघ्घर महतारी अव ।।

मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव
वीर शिवाजी के खड़क
राणा प्रताप अभिमानी अव
मैं भारत के माटी अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव ।।

पुरुषोत्तम साहू गुंडरदेही छत्तीसगढ़