कविता की अभिलाषा

विश्व कविता दिवस की शुभकामनाएं

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चाह नही मैं चारण पद हो
नृप का गौरव गुण गाऊ
चाह नही मैं श्रृंगारित हो,
प्रेयसी का मन बहलाऊँ
चाह नहीं मैं पात्र हंसी का
बनकर अट्ठहास लगवाऊ
चाह नही मैं देवों की आरती हो
अंधभक्ति दिखलाऊँ
चाह नही मैं राजनीति के कीचड़ से
खुद पर दाग लगाऊँ

शोषित पीड़ित मानवता की
सेवा का हो राग जहाँ
लहू बहाकर मातृभूमि की
रक्षा में हो त्याग जहाँ
आँसू क्रंदन देश प्रेम तुम
लेकर वर्णों का आकार
संयोजित हो रूप कविता का
कर देना मेरा स्वप्न साकार ।।

शब्द ही सुर शुलभ मेरा

शब्द ही सुर सुलभ मेरा
शब्द ही साज है मेरा।
अर्चना शब्द की करता
यही अंदाज है मेरा।।
शब्द आधार है मेरा
शब्द ही प्यार है मेरा।
अर्चना शब्द की करता
शब्द ही संसार है मेरा।।
शब्द को साधना दुष्कर
शब्द की साधना दुष्कर
शब्द स्वरूप केहरी का
शब्द को बांधना दुष्कर
कठिन है शब्द में रमना
कठिन ले शब्द को थमना
शब्द संसार में कितना
दुष्कर शब्द ले चलना

World Woman Day । विश्व महिला दिवस पर कविता

विश्व महिला दिवस पर नारी को समर्पित पंक्तियाँ

प्रथम कविता :-

सौजन्य : pixabay.com


प्रेम,समर्पण,व्यथा,वेदना
करुणा,पीड़ा,क्रंदन नारी
बहन,बेटियां, माँ और पत्नि
रिश्तों का सब बन्धन नारी ।
भरे स्नेह संस्कार बालमन
बने पूत रघुनन्दन नारी
बने प्रेरणा जब समाज में
रचे पति रामायण नारी ।
राष्ट्रभक्ति को त्याग पुत्र का
पन्नाधाय सा समर्पण नारी
युद्ध भूमि में सैनिक सेवा
बने पूत अभिनन्दन नारी ।

द्वितीय कविता :-

सौजन्य :-pixabay.com

हे जनयित्री हे मातृशक्ति,
हे स्नेहकरिणी दयाभक्ति
यश कीर्ति मान सब तुझसे ही
तुझसे ही मुझको प्राण मिला
सह गए अनेकों कष्टों को
पर होठों में नित मुस्कान मिला
सच कहता हूं जग की देवी
तुझसे जीवन दान मिला।।

वो रोटी गुथे प्रेम डाल
ममता करुणा के संग साथ
कब से भूखी वो स्वयं रही
पीकर पानी बिता गई रात
अघा गया न जब तक मैं
तब तक रुकती न उनकी हाथ
पड़ गए फफोले हाथों पर
चेहरे न कभी थकान मिली।
सच कहता हु जग की देवी
तुझसे जीवन दान मिली।।

सौजन्य :-pixabay.com

टिक-टिक करता मेरा बचपन
बन कर रही सदा परछाई
बड़ा हुआ कब कैसे हँसते
ये बात समझ न मेरे आई
दिन-दिन भी कई बरस लगेथे
खुशियो को जो तूने खपाई
बार एक जब भी मैं बोला
हरदम कपड़े नया दिलायी
कितनी सिलवट फ़टी साड़ियां
पहन गई मा कर तुरपाई
छुआ नही माँ मुझे मुसीबत
हरदम नई उड़ान मिला।
सच कहता हूं जग की देवी
तुमसे जीवन दान मिली।।

चलो मानवता के लिए एक दीप जलाये


दीप जले
अंधकार चीरकर
मन की पीड़ा दूरकर
उल्लसित मन
सुमन तरंग
ज्योतिर्मय जग में
भीनी सुगन्ध
दीप जले ,दीप जले!
अलसाई खेतों में
मेहनत का प्रतिफल हो
बंगले की आभा से
झोपड़िया रोशन हो
मानवता सजोर रहे
हिन्दू न मुस्लिम हो
माटी का नन्हा लोंदा
हाथों में साथ बढे
दीप जले, दीप जले!
घर की खिचडिया सही
भले न पकवान बने
तरसे न बचपन फिर
भूख न शैतान बने
नन्ही सी बिटिया की
आभा न आंच आये
खुशीयो को अपनी
दूजा न रो पाए
दीप जले,दीप जले!
बम और लरियो की
इतनी न धमाके हो
उजड़े न घर बार कोई
अपनो की यादें हो
सरहद सुकून मिले
अमन का बिसाते हो
हाथ बढ़े, गले मिले
दीप जले, दीप जले!
सहमी सी धरती में
अपनों का क्यो रोना
जीत जाए मानवता
हारे अब कोरोना
चिंतन मन सद्प्रयास
जन मन का साथ मिले
दीप जले-दीप जले…

शहीदों को नमन

नक्सली हमले में शहीद देशभक्तों को विनम्र श्रद्धांजलि,


कहीं टिटकता घोड़ा रूठा, कहीं रेशम का धागा
कहीं टूटा बुढ़ापे का लाठी,कहीं सुहाग विधाता
किसी मित्र ने साथी खोया,कहीं किसी ने भ्राता
दुख का अंत कहाँ रिश्तों में ,ससुर हुए बिन जमाता
मचा तबाही फिर दुष्टो की ,नक्सलमयि अंजाम
दण्डक वन की पीड़ा हरने,फिर आओ श्रीराम।।

सौजन्य :-facebook image

मानव ही मानव को छलते है,असन्तोष फिर छाये
तनिक स्वार्थ के चलते हमने,अनगित प्राण गंवाये
उजड़े-उजड़े घर बार यहाँ, खुद को खुद ही तलाश रहे
जल जंगल जमी हमारी ,फिरभी टुकड़ो को ताक रहे
भोली भाली वा-नर सेना का ,यह विकृत अंजाम
दण्डक वन की पीड़ा हरने,फिर आओ श्रीराम।।

सौजन्य :-facebook image

खर दूषणमयि आतंकों से, वनांचल आजाद करो
मरीचि छद्मवेश से ,अब तो पर्दाफाश करो
नुक्ताचीनी राजनीति ने, अब तक बंदरबाट किया
राम राज्य की मूल मंत्र से,धरती और आकाश भरो
जन-जन की अभिलाषाओं के एकमात्र तुम धाम
दण्डक वन की पीड़ा हरने,फिर आओ श्री राम।।