@@बाज की उड़ान@@

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एक बार की बात है कि एक बाज का अंडा मुर्गी के अण्डों के बीच आ गया. कुछ दिनों बाद उन अण्डों में से चूजे निकले, बाज का बच्चा भी उनमें से एक था. वो उन्हीं के बीच बड़ा होने लगा. वो वही करता जो बाकी चूजे करते, मिट्टी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्हीं की तरह चूँ-चूँ करता. बाकी चूजों की तरह वो भी बस थोडा सा ही ऊपर उड़ पाता, और पंख फड़-फडाते हुए नीचे आ जाता.

फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा. बाज बड़े शान से बेधड़क उड़ रहा था. तब उसने बाकी चूजों से पूछा कि- “इतनी ऊंचाई पर उड़ने वाला वो शानदार पक्षी कौन है?”

तब चूजों ने कहा- “अरे वो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही ताकतवर और विशाल है. लेकिन तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम तो एक चूजे हो.”

बाज के बच्चे ने इसे सच मान लिया और कभी वैसा बनने की कोशिश नहीं की. वो ज़िन्दगी भर चूजों की तरह रहा और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया.

दोस्तों! हममें से बहुत से लोग उस बाज की तरह ही अपना असली Potential जाने बिना एक Second-Class ज़िन्दगी जीते रहते हैं. हमारे आस-पास की Mediocrity हमें भी Mediocre बना देती है. हम ये भूल जाते हैं कि हम अपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी हैं. हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं है, पर फिर भी बस एक औसत जीवन जी के हम इतने बड़े मौके को गँवा देते हैं.

शिक्षा:-
आप चूजों की तरह मत बनिए। अपने आप पर, अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिए। आप चाहे जहाँ हों, जिस परिवेश में हों, अपनी क्षमताओं को पहचानिए और आकाश की ऊँचाइयों पर उड़ कर दिखाइए, क्योंकि यही आपकी वास्तविकता है।

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है
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हम दौड़ क्यों रहे हैं ??

आज सुबह पार्क में दौड़ते,
एक व्यक्ति को देखा।
मुझ से आधा किलोमीटर आगे था।
अंदाज़ा लगाया कि मुझसे थोड़ा धीरे ही भाग रहा था।
एक अजीब सी खुशी मिली।
मैं पकड़ लूंगा उसे,यकीं था।

मैं तेज़ और तेज़ दौड़ने लगा।आगे बढ़ते हर कदम के साथ,
मैं उसके करीब पहुंच रहा था।
कुछ ही पलों में,
मैं उससे बस सौ क़दम पीछे था।
निर्णय ले लिया था कि मुझे उसे पीछे छोड़ना है।गति बढ़ाई।

अंततः कर दिया।
उसके पास पहुंच,
उससे आगे निकल गया।
आंतरिक हर्ष की अनुभूति,
कि मैंने उसे हरा दिया।

बेशक उसे नहीं पता था
कि हम दौड़ लगा रहे थे।

मैं जब उससे आगे निकल गया,
एहसास हुआ
कि दिलो-दिमाग प्रतिस्पर्धा पर इस कद्र केंद्रित था…….

कि

घर का मोड़ छूट गया
मन का सकून खो गया
आस-पास की खूबसूरती और हरियाली नहीं देख पाया,
ध्यान लगाने और अपनी आत्मा को भूल गया

और

व्यर्थ की जल्दबाज़ी में
दो-तीन बार गिरा।
शायद ज़ोर से गिरने पर,
कोई हड्डी टूट जाती।

तब समझ में आया,
यही तो होता है जीवन में,
जब हम अपने साथियों को,
पड़ोसियों को, दोस्तों को,
परिवार के सदस्यों को,
प्रतियोगी समझते हैं।
उनसे बेहतर करना चाहते हैं।
प्रमाणित करना चाहते हैं
कि हम उनसे अधिक सफल हैं।
या
अधिक महत्वपूर्ण।
बहुत महंगा पड़ता है,
क्योंकि अपनी खुशी भूल जाते हैं।
अपना समय और ऊर्जा
उनके पीछे भागने में गवां देते हैं।
इस सब में अपना मार्ग और मंज़िल भूल जाते हैं।

भूल जाते हैं कि नकारात्मक प्रतिस्पर्धाएं कभी ख़त्म नहीं होंगी।
हमेशा कोई आगे होगा।
किसी के पास बेहतर नौकरी होगी।
बेहतर गाड़ी,
बैंक में अधिक रुपए,
ज़्यादा पढ़ाई,
खूबसूरत पत्नी,
ज़्यादा संस्कारी बच्चे,
बेहतर परिस्थितियां
और बेहतर हालात।

इस सब में एक एहसास ज़रूरी है
कि बिना प्रतियोगिता किए, हर इंसान श्रेष्ठतम हो सकता है।

असुरक्षित महसूस करते हैं चंद लोग
कि अत्याधिक ध्यान देते हैं दूसरों पर
कहां जा रहे हैं?
क्या कर रहे हैं?
क्या पहन रहे हैं?
क्या बातें कर रहे हैं?

जो है, उसी में खुश रहो।
लंबाई, वज़न या व्यक्तित्व।

स्वीकार करो और समझो
कि कितने भाग्यशाली हो।

ध्यान नियंत्रित रखो।
स्वस्थ, सुखद ज़िन्दगी जीओ।

भाग्य में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है।
सबका अपना-अपना है।

तुलना और प्रतियोगिता हर खुशी को चुरा लेते‌ हैं।
अपनी शर्तों पर जीने का आनंद छीन लेते हैं।

अपनी दौड़ खुद लगाओ,
किसी प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं
अपने जीवन को स्थिर, खुश और शांतपूर्ण बनाने के लिए।

🙏🙏🙏

Rating: 1 out of 5.

**परी या भूतनी**

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★ स्त्री की चाहत क्या है ★

एक विद्वान को फाँसी लगने वाली थी.
राजा ने कहा ~ तुम्हारी जान बख्श दूँगा,
अगर … मेरे एक सवाल का
सही उत्तर बता दोगे.

           प्रश्न था, कि ....

स्त्री , आख़िर चाहती क्या है ?

विद्वान ने कहा ~ मोहलत मिले, तो
पता कर के बता सकता हूँ.

राजा ने एक साल की मोहलत दे दी,

    विद्वान बहुत घूमा, 
      बहुत लोगों से मिला,
            पर कहीं से भी 
कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला.

  आखिर में किसी ने कहा ~
दूर जंगल में एक भूतनी रहती है.
    वो ज़रूर बता सकती है ...
      इस सवाल का जवाब.

विद्वान उस भूतनी के पास पहुँचा,
और अपना प्रश्न उसे बताया.
भूतनी ने कहा कि …
मैं एक शर्त पर बताउंगी,
अगर तुम मुझसे शादी कर लो.

उसने सोचा, सही जवाब न पता चला
तो जान … राजा के हाथ जानी ही है,
इसलिए शादी की सहमति दे दी.

शादी होने के बाद भूतनी ने कहा ~
चूंकि तुमने मेरी बात मान ली है,
तो मैंने तुम्हें खुश करने के लिए
फैसला किया है कि …
12 घन्टे … मै भूतनी और
12 घन्टे खूबसूरत परी बनके रहूँगी.

    अब तुम ये बताओ कि ...
दिन में भूतनी रहूँ या रात को ?

        उसने सोचा ... 
  यदि वह दिन में भूतनी हुई,
       तो दिन नहीं कटेगा,
  रात में हुई तो रात नहीं कटेगी.

अंत में उस विद्वान व्यक्ति ने कहा ~
जब तुम्हारा दिल करे
परी बन जाना,
जब दिल करे ~ भूतनी बन जाना.

   ये बात सुनकर भूतनी ने 

प्रसन्न हो कर कहा, चूंकि तुमने मुझे
अपनी मर्ज़ी करने की छूट दे दी है,
तो मैं हमेशा ही
परी बन के रहा करूँगी.

और यही ~ तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है.

   🙆🏻‍♀️    स्त्री हमेशा ....
अपनी मर्जी का करना चाहती है.

यदि स्त्री को ….
अपनी मर्ज़ी का करने देंगे, तो वो
👉🏽 परी बनी रहेगी, वर्ना भूतनी 👈🏽

 ◆  फैसला आप का  ◆ 
   ◆  ख़ुशी आपकी  ◆

सभी विवाहित पुरुषों को समर्पित

Rating: 1 out of 5.

जंगल का स्कूल

हुआ यूँ कि जंगल के राजा शेर ने ऐलान कर दिया कि अब आज के बाद कोई अनपढ़ न रहेगा। हर पशु को अपना बच्चा स्कूल भेजना होगा। राजा साहब का स्कूल पढ़ा-लिखाकर सबको Certificate बँटेगा।

सब बच्चे चले स्कूल। हाथी का बच्चा भी आया, शेर का भी, बंदर भी आया और मछली भी, खरगोश भी आया तो कछुआ भी, ऊँट भी और जिराफ भी।

FIRST UNIT TEST/EXAM हुआ तो हाथी का बच्चा फेल।

“किस Subject में फेल हो गया जी?”

“पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गया, हाथी का बच्चा।”

“अब का करें?”

“ट्यूशन दिलवाओ, कोचिंग में भेजो।”

अब हाथी की जिन्दगी का एक ही मक़सद था कि हमारे बच्चे को पेड़ पर चढ़ने में Top कराना है।

किसी तरह साल बीता। Final Result आया तो हाथी, ऊँट, जिराफ सब के बच्चे फेल हो गए। बंदर की औलाद first आयी।

Principal ने Stage पर बुलाकर मैडल दिया। बंदर ने उछल-उछल के कलाबाजियाँ दिखाकर गुलाटियाँ मार कर खुशी का इजहार किया।

उधर अपमानित महसूस कर रहे हाथी, ऊँट और जिराफ ने अपने-अपने बच्चे कूट दिये
नालायकों, इतने महँगे स्कूल में पढ़ाते हैं तुमको | ट्यूशन-कोचिंग सब लगवाए हैं। फिर भी आज तक तुम पेड़ पर चढ़ना नहीं सीखे।
सीखो, बंदर के बच्चे से सीखो कुछ, पढ़ाई पर ध्यान दो।

फेल हालांकि मछली भी हुई थी। बेशक़ Swimming में First आयी थी पर बाकी subject में तो फेल ही थी।

मास्टरनी बोली, “आपकी बेटी के साथ attendance की problem है

मछली ने बेटी को आँखें दिखाई!
बेटी ने समझाने की कोशिश की कि, “माँ, मेरा दम घुटता है इस स्कूल में। मुझे साँस ही नहीं आती। मुझे नहीं पढ़ना इस स्कूल में। हमारा स्कूल तो तालाब में होना चाहिये न?”

मां – नहीं, ये राजा का स्कूल है।

तालाब वाले स्कूल में भेजकर मुझे अपनी बेइज्जती नहीं करानी। समाज में कुछ इज्जत Reputation है मेरी। तुमको इसी स्कूल में पढ़ना है। पढ़ाई पर ध्यान दो।

हाथी, ऊँट और जिराफ अपने-अपने बच्चों को पीटते हुए ले जा रहे थे।

रास्ते में बूढ़े बरगद ने पूछा, “क्यों पीट रहे हो, बच्चों को?”

जिराफ बोला, “पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गए?”

बूढ़ा बरगद सोचने के बाद पते की बात बोला,

“पर इन्हें पेड़ पर चढ़ाना ही क्यों है ?”
उसने हाथी से कहा,

“अपनी सूंड उठाओ और सबसे ऊँचा फल तोड़ लो। जिराफ तुम अपनी लंबी गर्दन उठाओ और सबसे ऊँचे पत्ते तोड़-तोड़ कर खाओ।”
ऊँट भी गर्दन लंबी करके फल पत्ते खाने लगा।
हाथी के बच्चे को क्यों चढ़ाना चाहते हो पेड़ पर? मछली को तालाब में ही सीखने दो न?

दुर्भाग्य से आज स्कूली शिक्षा का पूरा Curriculum और Syllabus सिर्फ बंदर के बच्चे के लिये ही Designed है। इस स्कूल में 35 बच्चों की क्लास में सिर्फ बंदर ही First आएगा। बाकी सबको फेल होना ही है। हर बच्चे के लिए अलग Syllabus, अलग Subject और अलग स्कूल चाहिये।

हाथी के बच्चे को पेड़ पर चढ़ाकर अपमानित मत करो। जबर्दस्ती उसके ऊपर फेलियर का ठप्पा मत लगाओ। ठीक है, बंदर का उत्साहवर्धन करो पर शेष 34 बच्चों को नालायक, कामचोर, लापरवाह, Duffer, Failure घोषित मत करो।

मछली बेशक़ पेड़ पर न चढ़ पाये पर एक दिन वो पूरा समंदर नाप देगी।

शिक्षा – अपने बच्चों की क्षमताओं व प्रतिभा की कद्र करें चाहे वह पढ़ाई, खेल, नाच, गाने, कला, अभिनय,व्यापार, खेती, बागवानी, मकेनिकल, किसी भी क्षेत्र में हो और उन्हें उसी दिशा में अच्छा करने दें |

जरूरी नहीं कि सभी बच्चे पढ़ने में ही अव्वल हो! बस जरूरत हैं उनमें अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्यों की जिससे बच्चे गलत रास्ते नहीं चुने l

सभी अभिभावकों को सादर समर्पित
🙏🙏🙏

माँ तो आखिर माँ होती है

★माँ★

माँ तो आख़िर माँ होती है,
इनकी कभी कहाँ ना होती है।
माँ तो आख़िर माँ होती है।।

माँ ममता की मूरत है,
बड़ी भोली तेरी सूरत है।
पूत भले कपूत हो जाए,
माँ न होती, कुमात है।।
माँ की हरदम हाँ होती है।।
माँ तो आखिर……….

Happy Mothers day

माँ का हृदय विशाल है,
बिना किसी लालसा के माँ,
बच्चों की करती देखभाल है।।
माँ तो होती वरदान है।।
जग में ऐसी कौन और होती है?
माँ तो आख़िर………..

माँ तू मेरा दृढ़ विश्वास है,
तुझसे है मेरी ज़िंदगी।
मेरे जीवन में तू ख़ास है।
मुझको तुझ पर नाज़ है।।
माँ कभी न डगमगाती है।।
माँ तो आख़िर………

माँ ममता की खान है,
प्यारी सी तेरी मुस्कान है।
तू मेरे लिए भगवान है,
बच्चों के सारे दुःख हरतीं।।
तुमसे रोशन घर,मेरी जहाँ होती है।।
माँ तो आखिर………


🙏महेन्द्र कुमार साहू की कलम से🙏खलारी(गुण्डरदेही)बालोद