#मैं हूँ ना#

जीवन जीने पाली आशा,
तीन शब्द से रहा ना प्यासा,
बुझता दीपक फिर से जलता,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

भरे रंग खुशियों की चाबी,
दुख में भी सुख होते हावी,
साथ निभाने का वह वादा,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

मात -पिता और भाई- बहन,
करते नव सदस्य का आगमन,
अपनों से तारीफों के पुल,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

बने बनते रिश्तो का नाता,
प्रेम का शब्द सभी को भाता,
सुनकर आकर्षण बढ़ जाता,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

छोटे शब्द सजा सुंदर वाक्य,
जगा देते हैं मन में हास्य,
तन प्रसन्न हो जाता ज्यादा,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

dixit

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