“मैं भारत के माटी अव”छत्तीसगढ़ी कविता

मैं भारत के माटी अव
मैं भारत के माटी अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव ।
भगत सिंह ,आजाद ,गुरु अउ
बेटी लक्ष्मी के धानी अव
जीवन त्याग करईया गांधी
अउ सुभाष के बानी अव।।

मैं भारत के माटी अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव
रात दिन मोर सेवा करईया
फउजी पुलिस के दाई अव
कारगिल म जेन खून बहिस
में उहि खून के लाली अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव ।।

जम्मों झन के पेट भरइया
हलधर के संगवारी अव
भूख पियास में काम करइया
मैं गरीब के थारी अव
मैं भारत के माटी अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत की माटी अव ।।

मोर मान सनमान के खातिर
जेन जिनगी ल गंवाए हे
मोर सेवा के रज के खातिर
जेन जिनगी ल खपाए हे
उहि मयारूक बेटा मन के
मैं सुघ्घर महतारी अव ।।

मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव
वीर शिवाजी के खड़क
राणा प्रताप अभिमानी अव
मैं भारत के माटी अव
मैं अमर देश बलिदानी
मैं भारत के माटी अव ।।

पुरुषोत्तम साहू गुंडरदेही छत्तीसगढ़

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