New hindi story for kids । किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान

एक गांव में एक लड़का रहता था भोलाराम , तकरीबन 10 साल का , जैसा नाम वैसा ही काम , बहुत ही भोला – भाला और कमजोर बुद्धि का बालक , दुनिया की चतुराई से अनभिज्ञ । उसकी मां का निधन हो चुका था , उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी । उसकी सौतेली मां उसे अच्छे से संभालती थी । लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसकी सौतेली मां के बच्चे हुए । धीरे-धीरे उस सौतेली मां का व्यवहार बदलने लगा और वह उसे तरह-तरह से प्रताड़ित करने लगी लेकिन वह लड़का बहुत भोला-भाला था उसे यह बात समझ नहीं आती थी । वह अपनी मां के बताए अनुसार ही चलता था उसके मन में अपनी मां के प्रति कभी भी द्वेष की भावना नहीं आई । घर पर ही रहता था और अपनी मां के साथ और अपने पिता के साथ काम करने में मदद करता था ।

कुछ सालों बाद उसके बाकी के भाई – बहन बड़े हो गए और वह लड़का जवान हो गया था । अब उसकी शादी करने की उम्र हो चुकी थी , वह गोरा और गठीले बदन वाला एक नौजवान बन गया था । पिता ने जब उसकी मां के सामने भोलाराम के विवाह की बात की तो , सौतेली मां ने सोचा कि जब इसका विवाह हो जाएगा और इसका परिवार बस जाएगा तब आज नहीं तो कल इसे जायदाद में हिस्सा भी देना पड़ेगा । इसलिए उसने उसे मारने का षड्यंत्र रचा उसके पिता बहुत भोले – भाले थे और दिन भर खेतों में काम करते रहते थे । इसलिए उनको इस बात की भनक नहीं लगी ।

एक दिन उस सौतेली मां ने लड्डू और पूरी बनाएं और एक पोटली में पूड़ी और लड्डू बांध कर जंगल के रास्ते अपने मामा के घर संदेश पहुंचाने के लिए बहाने भोलाराम को भेजने का उपाय किया । षड्यंत्र के तहत उसकी मां ने उसके लड्डू में जहर मिला दिया था उसने लड़के से कहा कि तुम्हें जब रास्ते में भूख लगेगी तब तुम इसे खा लेना और आधी रोटी और लड्डू अपने मामा के घर ले जाना । लड़का अपनी मां की बात मानकर सुबह – सुबह ही नहा धोकर तैयार होकर पोटली लेकर अपने मामा के घर संदेशा पहुंचाने के नाम से घर से निकल पड़ा । चलते – चलते वह जंगल तक पहुंच गया । गर्मी का दिन था इसलिए उसे बहुत ज्यादा थकान लग रही थी ।

जब वह जंगल के बीच में पहुंचा तो वह बहुत ही थक चुका था । उसने सोचा कि यहां पर थोड़ी देर आराम कर लेते हैं । उसने एक छोटे झरने के किनारे बड़े से पत्थर पर अपनी पोटली रखी और पत्थर की खोह में आराम करने लगा थोड़ी देर बाद वहां एक हाथी आया । हाथी लड्डू की सुगंध पाकर पोटली के पास पहुंचा । हाथी ने सूंड से उस पोटली को खोल दिया और उसमें के लड्डू और पूड़ी खा लिए । इस बीच उस लड़के की नींद भी खुल गई और उसने देखा कि वह हाथी उसके खाने को बर्बाद कर रहा है , गुस्से में आकर उसने हाथी को मारना शुरू किया । हाथी ने उसे अपनी सूंड में लपेट लिया वह अपने मुट्ठी से उसके सिर पर बार – बार वार कर रहा था । उधर से राजा की सेना उस हाथी का पीछा करते हुए आ रहा था और जोर-जोर से चिल्ला रहे थे । उन्होंने देखा कि एक लड़का हाथी को कैसे मार रहा है , थोड़ी ही देर में वह हाथी जहर के प्रभाव से गिर पड़ा और थोड़ी ही देर में उसकी मृत्यु हो गई ।

सिपाही चिल्लाने लगे कि यह बहुत बलवान लड़का है ,जिसने अपने मुक्के के प्रहार से इस विशालकाय हाथी को मार दिया और वे नाचने लगे । सिपाहियों ने उस लड़के को बताया कि यह राज दरबार का हाथी है कुछ दिन पहले ही पागल हो गया और राज दरबार से भागकर लोगों को घायल कर रहा था । इसलिए हम इसे पकड़ने आए थे राजा ने इस हाथी को मारने के आदेश दिए हैं । इस हाथी ने लोगों को बहुत परेशान कर रखा था लेकिन तुमने इसे अपने बाहुबल से मार दिया , तुम बहुत महान हो ।

सिपाहियों ने कहा कि राजा बहुत खुश होंगे, तुम्हें बहुत सारे इनाम मिलेंगे , तुम अभी हमारे साथ चलो । लड़का सिपाहियों के साथ चला गया उसने सोचा कि मुझे इनाम में जो धन मिलेगा उसे मैं अपने घर में ले जाऊंगा तो मेरे माता और पिता बहुत ही खुश होंगे । सिपाहियों के साथ वह लड़का राजदरबार में पहुंचा । सिपाहियों ने सारी बात राजा को बता दी , राजा बहुत खुश हुए और उसे 100 सोने की स्वर्ण मुद्रा इनाम के रूप में प्रदान की ।

राजा ने पूछा कि तुम क्या काम करते हो ? लड़के ने कहा – मैं अपने पिता के साथ खेतों में काम करता हूं । राजा ने कहा – तुम बहुत बहादुर हो , तुम बहुत ही शक्तिशाली हो , तुम्हें हमारे दरबार में एक वीर योद्धा के रूप में होना चाहिए । लड़का यह सुनकर बहुत ही खुश हुआ और उसने राजा की बात मान ली और वहां पर सैनिक का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया । उसकी मेहनत को देखकर राजा ने उसे सेना की एक टुकड़ी का सेनापति बना दिया । इधर बहुत दिनों तक उस लड़के की कोई खोज – खबर नहीं थी । इसलिए उसके परिवार वालों ने उसे मृत मान लिया और उसकी सौतेली मां मन ही मन बहुत ही खुश होने लगी ।

थोड़े ही दिनों बाद एक शेर ने राजा के राज्य में उत्पात मचाना शुरू कर दिया और लोगों को मारना शुरू कर दिया । राजा ने तुरंत ही अपनी सेनाओं के सेनापतियों को आदेश दिया कि उस शेर को ढूंढ कर मार दिया जाए । भोलाराम भी अपनी टुकड़ी के साथ उस शेर को पकड़ने के लिए जंगल में छान मारने लगा । एक दिन जब वह अपनी सेना के साथ शेर को ढूंढ रहा था तब उसी जंगल में एक किसान मिला । किसान ने उससे कहा कि – सेनापति जी मेरा एक बैल घर से भागकर घने जंगल में आ गया है , मैं उसे तलाश करते -करते थक गया हूं । अगर आप लोगों को वह बैल मिल जाए तो उसे आप अपने पास रख लीजिएगा और मेरे गांव में मुझे सूचना भिजवा दीजिएगा ।

सेनापति ने किसान से कहा कि – आप चिंता मत करिए अगर वह बैल हमको मिला तो हम उसे अवश्य ही आप तक पहुंचा देंगे , अब आप अपने घर चले जाइए अकेले जंगल में भटकना ठीक नहीं है । रात होने पर वे पेड़ों के ऊपर सो जाते थे और कुछ सैनिक नीचे तंबू बनाकर निगरानी करते थे । उसी दिन रात को सेनापति को एहसास हुआ कि , कोई जानवर उसके पेड़ के नीचे खड़ा है , उसने ध्यान से देखा और कहा अरे यह तो किसान का बैल है । रस्सी का फंदा लेकर भोलाराम ने उसके ऊपर छलांग लगा दी और उसकी गर्दन को रस्सी से लपेट दिया सभी सैनिक भी उसके पीछे-पीछे उस पर टूट पड़े । रात के अंधेरे में भगदड़ मच गई सैनिकों ने बड़े – बड़े जाल फेंक कर उसको पकड़ लिया ।

सभी सैनिकों ने मशाल जलाई तब उस लड़के ने देखा , अरे यह तो खूंखार शेर है ! उसकी बोलती बंद हो गई लेकिन सारे सैनिक उसकी जय-जयकार करने लगे । शेर को पिंजरे में कैद कर राजा के पास लाया गया । भोलाराम के इस कारनामे को देखकर राजा अत्यंत ही प्रसन्न हुए , उन्होंने उसे अपने राज्य का मुख्य सेनापति घोषित कर दिया । उसकी बहादुरी को देख कर अतिसुन्दर राजकुमारी इतनी प्रसन्न हुई कि उन्होंने उससे विवाह करने की घोषणा कर दी ।

राजा ने भी खुश होकर उनके विवाह को मंजूरी दे दी । इस तरह राजकीय ठाठ – बाठ से उसका विवाह संपन्न हुआ । वह अपनी नई – नवेली दुल्हन को लेकर सैनिकों के बेड़े के साथ अपने गांव की ओर रवाना हुआ । उसके गांव के लोग उसे देखकर हक्के – बक्के रह गए । जब वह अपने घर के पास जाकर खड़ा हुआ तो उसकी मां और पिताजी उसको देखकर सन्न रह गए । सौतेली मां के पैरों तले तो मानों जमीन ही खिसक गई ।

उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला । लड़के ने अपनी सारी बात अपने परिवार वालों की बताई और कहा कि आज से हम राज महल में रहेंगे , मैं आप सबको लेने के लिए आया हूं । यह बात सुनकर उसकी सौतेली मां को मन ही मन बहुत पश्चाताप हुआ और अपने आपको कोसने लगी और खूब रोई , उसने उसके साथ राजमहल जाने के लिए इंकार कर दिया । लेकिन उस लड़के की बार-बार जिद करने पर वह जाने के लिए मान गई और उसके बाद उसने कभी भी उस लड़के और उसकी पत्नी के बारे में कभी भी अपने मन में बुरे विचार नहीं लाएं इस तरह सभी लोग राजमहल में हंसी – खुशी रहने लगे ।

पारंपरिक लोककथा
पुरुषोत्तम साहू

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