कोरोना बुखार

सर्दी, खाँसी संग होवय बुखार
मनखे के जिनगी म जीवलेवा वार
जाँच करालव जी तुरतेच जाके
बाढ़त हे कोरोना ह तीर तखार..

मनखे ले मनखे के दु गज के दूरी
मुँहू म लगाहु जी मास्क जरूरी
साबुन ले हाथ धोवाई ल करके
कर लेव उदिम झन होवय बीमारी

मनखे के भीड़ के बचालो तन ल
घर म बितावव जी दुखी-सुखी दिन ल
करव दुरिहा ले राम राम पाँव पैलगी
नई चिन्हे एहा अमीरी-गरीबी…

खुद के सुरक्षा अउ साफ सफाई
टीका लगाबो अउ लड़बो लड़ाई
हिम्मत ले मिल जुल के लइका सियान
विपदा ल हर लेबो बचाबो जी प्राण…

डरव झन हिम्मत ले सीध होथे कारज
सुम्मत ले चाटी ह चढ़ जाथे परबत
सुनता ले मिलजुल के अंतस ले
लड़
स्वस्थ होवय मनखे अउ खुशहाल छत्तीसगढ़….

#मैं हूँ ना#

जीवन जीने पाली आशा,
तीन शब्द से रहा ना प्यासा,
बुझता दीपक फिर से जलता,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

भरे रंग खुशियों की चाबी,
दुख में भी सुख होते हावी,
साथ निभाने का वह वादा,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

मात -पिता और भाई- बहन,
करते नव सदस्य का आगमन,
अपनों से तारीफों के पुल,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

बने बनते रिश्तो का नाता,
प्रेम का शब्द सभी को भाता,
सुनकर आकर्षण बढ़ जाता,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

छोटे शब्द सजा सुंदर वाक्य,
जगा देते हैं मन में हास्य,
तन प्रसन्न हो जाता ज्यादा,
जब कहा उन्होंने मैं हूं ना।

dixit

अटकन बटकन का भावार्थ

1- ( अटकन )
अर्थ-
जीर्ण शरीर हुआ जीव जब भोजन उचित रूप से निगल तक नहीँ पाता अटकने लगता है–

2- ( बटकन )
अर्थ-
मृत्युकाल निकट आते ही जब पुतलियाँ उलटने लगती हैं-

3- ( दही चटाकन )
अर्थ –
उसके बाद जब जीव जाने के लिए आतुर काल में होता है तो लोग कहते हैँ गंगाजल पिलाओ

4- ( लउहा लाटा बन के काटा )
अर्थ-
जब जीव मर गया तब श्मशान भूमि ले जाकर लकड़ियों से जलाना अर्थात जल्दी जल्दी लकड़ी लाकर जलाया जाना

6- ( तुहुर-तुहुर पानी गिरय )
अर्थ-
जल रही चिता के पास खड़े हर जीव की आँखों में आंसू होते हैं

7- ( सावन में करेला फुटय )
अर्थ-
अश्रुपूरित होकर कपाल क्रिया कर मस्तक को फोड़ना |

8- ( चल चल बेटा गंगा जाबो )
अर्थ-
अस्थि संचय पश्चात उसे विसर्जन हेतु गंगा ले जाना ।

9- ( गंगा ले गोदावरी जाबो )
अर्थ-
अस्थि विसर्जित के लिए तीर्थ यात्रा कर घर लोटना।

10- (आठ नगर पागा गुलाब सिंह राजा ) अर्थ- पगबंदी – अन्य अन्य गांव से आने वाले पगबंदी करते हैं और आशीर्वाद देते हैं कि आज से आप इस घर के मुखिया हो या राजा हो।

11- ( पाका-पाका बेल खाबो )
अर्थ-
घर में पक्वान्न (तेरहवीं अथवा दस गात्र में) खाना और खिलाना |
धन संपत्ति बिना महन्त के मिलना।

12- ( बेल के डारा टुटगे )
अर्थ-
हमारे परिवार के एक सदस्य कम हो गया।

13- ( भरे कटोरा फुटगे )
अर्थ-
उस जीव का इस संसार से नाता छूट गया ।
भरे पूरे परिवार बिखर गया।

यह प्रतीकात्मक बाल गीत इतना बड़ा सन्देश देता रहा और अर्थ समझने में इतने वर्ष लग गए।

आज हवा के पैसे हैं !

कल तक पैसे की हवा थी साहब
आज हवा के पैसे हैं

कभी सोचा नहीं था,
ऐसे भी दिन आएँगें।🤔

छुट्टियाँ तो होंगी पर,
मना नहीं पाएँगे । 🛳️

आइसक्रीम का मौसम होगा,
पर खा नहीं पाएँगे ।🍦

रास्ते खुले होंगे पर,
कहीं जा नहीं पाएँगे। 🛤️

जो दूर रह गए उन्हें,
बुला भी नहीं पाएँगे।🙅🏼‍♀️

और जो पास हैं उनसे,
हाथ मिला नहीं पाएँगे।🤝

जो घर लौटने की राह देखते थे,
वो घर में ही बंद हो जाएँगे।🏢

जिनके साथ वक़्त बिताने को
तरसते थे,उनसे ऊब जाएँगें।😏

क्या है तारीख़ कौन सा
वार,ये भी भूल जाएँगे।🤤

कैलेंडर हो जाएँगें बेमानी,
बस यूँ ही दिन-रात बिताएँगे।😓

साफ़ हो जाएगी हवा पर,
चैन की साँस न ले पाएँगे।😷

नहीं दिखेगी कोई मुस्कराहट,
चेहरे मास्क से ढक जाएँगें।😷

ख़ुद को समझते थे बादशाह,
वो मदद को हाथ फैलाएँगे। 🖐️

क्या सोचा था कभी,
ऐसे दिन भी आएंगे।।😯

डामन लाल पटेल
सहायक शिक्षक
ग्राम-अरमरीकला

शिक्षक दिवस पर कविता

*शिक्षक दिवस हेतु शिक्षकों को समर्पित मेरी पंक्तिया*

मेरे शिक्षक का साथ
****************
अबूझ लकीर ही थे वे
कुछ बिंदु सरीखे लगते थे
काले पट्टी में श्वेत चाक
बनकर कुछ चित्र उभरते थे
उंगली को मिला सहारा तब
पीठ में अपनेपन का थाप
कुछ लकीरों आए वर्ण बने
पाकर मेरे शिक्षक का साथ…

गूँगा था तब तलक स्वयँ
मन कोरी जब तक ज्ञान बिना
मां की लोरी तो मन्त्र ही थे
जिनसे शब्दों का अहसास मिला
कुछ भाव मेरे भीतर जागे
पर साहस शिक्षा से आई
परी कहानी ,चन्दा मामा
मुनिया की दुनिया से शुरू पढ़ाई
मंच दिलाकर और निखारा
ताली का वो पहली हाथ
तुतलाते हुए लफ़्ज़े शब्द बने
पाकर मेरे शिक्षक का साथ…

कभी सख्त हो दिए डांट
कभी सीख की सरल बात
अनगित लम्हो का दौर याद
सृजनदूत वे शिल्पकार
सीधे-सादे जीवनधारा
पर मन मे थे उच्च विचार
ध्वनि घण्टी पर बंधे नियम
समय बोध कर्तव्य पाठ
अतीत हुआ सुखद वर्तमान
पाकर मेरे शिक्षक का साथ….