सहपाठी की सीख

 बात थोड़े समय पहले की है, वर्ष 1997 माह फरवरी का, जब मैं (ऋषि कुमार दीक्षित) आगरा के एक वोकेशनल इंस्टीट्यूट से बीएससी (कम्प्यूटर) कोर्स के द्वितीय सेमेस्टर में अध्ययनरत था। क्लास में सभी मिलजुल कर बैठा करते थे।

छात्र-छात्राएं आपस में बैठकर विषय से संबंधित समय-समय पर चर्चा किया करते थे। कई बार ऐसा समय आया, जब मैं अपनी सहपाठी के साथ चर्चा करता था।

एक बार जब मैं अपनी सहपाठी के साथ चर्चा कर रहा था, तो मन में उसको चॉकलेट (बार- 1,रुपए 10) देने का विचार आया, जो मैंने अपने स्वयं के खाने के लिए रखी थी, बैग से निकालकर उसको देने के लिए हाथ बढ़ाया। 

लगभग चार-पांच सेकंड सोचने के बाद हुए वार्तालाप का विवरण - 
New short real hindi story
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सहपाठी – क्या यह चॉकलेट मेरे लिए लेकर आए हो?
ऋषि – हां।
सहपाठी – चॉकलेट के पैसे कहां से आए?
ऋषि – मुझे मेरे पिताजी ने दिए हैं।
सहपाठी – पैसे तुम्हारी पढ़ाई के लिए दिए होंगे न।
ऋषि – हां।


सहपाठी – क्या तुमको इस प्रकार से चॉकलेट में पैसे खर्च करने चाहिए? पिता के पैसे को इस तरह बरबाद नहीं करना चाहिए। जब खुद कमाओगे तो जानोगे न।
ऋषि – —–
सहपाठी – बताओ न।
ऋषि – तुमने सही कहा।
सहपाठी – मैं इसे नहीं ले सकती।
ऋषि – ठीक है, आगे से ध्यान रखूंगा।
सहपाठी – कोई बात नहीं।चलो अपने विषय पर ध्यान देते हैं।

मुझे ऐसी सीख मिली जिसको मैनें अपने जीवन में अपनाया। सच में स्त्री बहुत ही महान होती है। मेरा उन सभी माता पिता को नमन जो अपने बच्चों में इतने अच्छे संस्कार भरते है। मेरी उस सहपाठी को भी मैं नमन करता हूं, जिसने मुझे जीवन जीने का तरीका बताया। कभीभी माता पिता के पैसे को अनावश्यक खर्च नहीं करना चाहिए। कितनी मुश्किल से धन आता है।

(यदि मेरी इस घटना से किसी को कोई दुख पहुचा हो, कृपया अवगत करा दें, मैने केवल स्त्री की महानता का वर्णन किया है)।

चतुर बेटी। Intresting story for kids 2020।

बहुत समय पहले की बात है ,एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी, वह बहुत उदास रहती थी । वह हर समय अपनी बेटी की यादों में खोए हुए रहती थी ।
उसकी इकलौती बेटी का विवाह पिछले वर्ष ही पास के ही एक गांव में हो गया था । वह अपने बिटिया के घर जाना चाहती थी , किंतु उसके गांव के रास्ते में एक घनघोर जंगल पड़ता था ।
उस जंगल को पार करने के लिए लोग डरते थे, वहां खूंखार जंगली जानवर भटकते रहते थे । इस तरह बुढ़िया कई दिनों तक सोचती रही ।
एक दिन उसने निश्चय कर लिया कि अब कुछ भी हो जाए मैं अपनी बेटी के घर जरूर जाऊंगी और ऐसा सोचकर अगले ही दिन सुबह वह एक पोटली में कुछ खाना और कपड़े लिए हाथ में डंडा पकड़े घर से निकल गई ।

कुछ दूर चलने के बाद जंगल शुरू हुआ जंगल में घुसते ही उसका कलेजा कांपने लगा ।
फिर भी बेटी के याद में उसने अपनी हिम्मत बढ़ाई और धीरे-धीरे जंगल में सावधानी से आगे बढ़ने लगी । कुछ ही देर बाद उसके सामने गुर्राता हुआ एक चीता आया ।
उस चीते ने कहा – ऐ बुढ़िया तुम कहां जा रही हो ?? मैं बहुत भूखा हूं । मैं तुम्हें खा जाऊंगा । बुढ़िया को तो जैसे काटो तो खून नहीं ! उसके मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी ,उसके हाथ पैर कांपने लगे ।
लेकिन तभी बुढ़िया ने अचानक कहा कि – बेटा मुझे खाने से तुम्हें क्या मिलेगा ? मेरे शरीर में तो माँस ही नहीं है , सिर्फ हड्डियां ही हड्डियां है ।
तुम मुझे बाद में खा लेना , मैं अपनी बेटी के घर जा रही हूं । मैं वहां से बढ़िया खा – पीकर मोटी – तगड़ी होकर जब वापस आऊंगी, तब तुम मुझे खा लेना ।
चीता ने कहा – तुम मुझे बेवकूफ तो नहीं बना रही हो ? बुढ़िया ने कहा – नहीं – नहीं बेटा , मैं तुम्हें बेवकूफ कैसे बना सकती हूं ! तुम चाहो तो अभी मुझे खा सकते हो , लेकिन तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा । यही अच्छा होगा कि तुम मुझे बेटी के घर से आने के बाद खा लो ।
मैं एक नजर अपनी बेटी को देखना चाहती हूं । चीता ने कहा – ठीक है बुढ़िया , मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा , अब जाओ और जल्दी आना ।
बुढ़िया डरते हुए आगे बढ़ी , थोड़े ही दूर जाने के बाद बड़े-बड़े बालों वाला एक काला भालू उसके पास आया और जोर से गुर्राया । भालू ने कहा – ऐ बुढ़िया! मैं तुम्हें मार कर खा जाऊंगा , मुझे बहुत भूख लगी है ।
बुढ़िया ने फिर भालू से कहा कि – बेटा मेरा शरीर तो एकदम सूखा हुआ है , मांस इसमें है ही नहीं । तुम्हें मुझे खा कर क्या मिलेगा ? मैं अपनी बेटी के घर जा रही हूं , वहां से खा -पीकर मोटी – तगड़ी होकर जब वापस आऊंगी, तब मुझे तुम खा लेना ।
भालू ने कहा – तुम ये क्या कह रही हो ! तुम बचकर जाना चाहती हो ? मैं तुम्हारे बहकावे में नहीं आऊंगा । मैं तुम्हें अभी मार कर खा जाऊंगा ।
बुढ़िया ने कहा नहीं – नहीं बेटा , मैं भला तुमसे क्यों झूठ बोलूंगी , तुम मेरा विश्वास करो , मैं वापस जरूर आऊंगी और तुम्हें खाने में भी मजा आएगा , मैं तुम्हें विश्वास दिलाती हूं कि मैं तुम्हारे पास वापस जरूर आऊंगी ।
भालू ने कुछ सोचते हुए कहा – ठीक है बुढ़िया तुम वापस जरूर आना , मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा , जाओ अब तुम जल्दी जाओ । बुढ़िया मन ही मन सोच रही थी कि मैंने कैसे इन लोगों से छुटकारा पा लिया है ।
कुछ दूर आगे चलने पर बुढ़िया को एक खूंखार बाघ दिखाई दिया । बाघ ने दहाड़ते हुए कहा – ऐ बुढ़िया तुम कौन हो ? मैं तुम्हें खा जाऊंगा ! मुझे बहुत भूख लगी है ।
बुढ़िया ने फिर उसके सामने हाथ जोड़ते हुए कहा – बाघ बेटा अभी मुझे खाने से तुम्हें क्या मिलेगा मेरा शरीर तो सूख चुका है , इसमें अब सिर्फ हड्डियां ही हड्डियां है , मांस तो है ही नहीं ।
मैं अपनी बेटी के घर जा रही हूं , वहां पर मैं बढ़िया खा – पीकर , मोटी -तगड़ी होकर जब वापस आऊंगी , तब मुझे खा लेना । तभी तो तुम्हें खाने का आनंद मिलेगा । बाघ ने कहा – मुझे बहलाने की कोशिश मत करो ।
बुढ़िया ने कहा – मैं तुम्हें नहीं बहला रही बेटा , मेरे तो शरीर में ताकत ही नहीं है , मैं तुमसे भला दुश्मनी कैसे कर सकती हूँ । तुम मेरा विश्वास करो मैं एक न एक जल्दी ही तुम्हारे पास जरूर आऊंगी , तुम मेरा इंतजार करना ।
बाघ ने कहा – ठीक है , मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा , भूलना मत तुम जरूर आना वरना तुम्हारा अंजाम बहुत बुरा होगा , मैं तुम्हें जहां भी छुपी होगी वहीं से ढूंढ लूंगा ।
बुढ़िया मन ही मन मुस्कुराते हुए आगे बढ़ी और अपनी बेटी के घर तक जा पहुंची , घर में पहुंचते ही उसने अपनी बेटी को गले से लगाया और खूब रोई । फिर बेटी ने उसका मान – सम्मान किया और उसके खाने के लिए अच्छे-अच्छे पकवान बनाएं ।
इस तरह महीनों तक बुढ़िया अपनी बेटी और दामाद के साथ हंसी-खुशी रहने लगी । बुढ़िया तंदुरुस्त हो गई । 1 दिन बुढ़िया ने कहा कि – बेटी मुझे यहां पर आए हुए अब बहुत दिन हो गए हैं , अब मुझे वापस घर जाना चाहिए ।
बेटी ने जिद की , कि आप और कुछ दिन रहे , आप इतनी जल्दी हमें छोड़कर नहीं जा सकती । बेटी की जिद करने पर मां ने कहा – ठीक है , मैं सिर्फ 1 दिन और रुकूँगी और फिर अपने घर चली जाऊंगी । बेटी ने कहा – ठीक है मां ।
अगले दिन सुबह बुढ़िया उठ कर नहा – धोकर जाने की तैयारी करने लगी । बेटी ने भी उसके लिए तरह-तरह के पकवान बनाकर खिलाएं , लेकिन वह चिंता में डूबी हुई थी , उसको चिंता में देख कर उसकी बेटी ने पूछा – क्या है मां तुम बहुत उदास हो ? मैं तो कहती हूं कि , तुम यहीं पर हमारे साथ ही सदा के लिए रुक जाओ आखिर वहां अकेली रह कर क्या करोगी ।
वहां तुम्हारा कोई सहारा भी नहीं है इससे अच्छा है तुम हमारे पास ही रह जाओ । बुढ़िया ने कहा – नहीं लाडो नहीं , बेटी के घर रहना उचित नहीं है , मुझे घर ही जाना है । मुझे एक बात की बहुत चिंता है , लेकिन मैं तुम्हें यह बताना नहीं चाहती थी ।
मैं उस मुसीबत से कैसे पार पाऊंगी यही मैं सोचती रहती हूं । बेटी ने कहा – मां आप मुझे बताइए आपको क्या परेशानी है । मैं आपकी परेशानी को जरूर दूर कर दूंगी । मां ने बेटी से कहा कि – जब मैं तुम्हारे घर आ रही थी तो , जंगल के रास्ते में मुझे चीता , बाघ और एक भालू मिला था ।
उन्होंने मुझे खाने की कोशिश की बड़ी मुश्किल से मैंने उन्हें मनाया कि मुझे अभी मत खाओ , अभी मेरे शरीर में मांस ही नहीं है , मैं अपनी बेटी के घर जा रही हूं और वहां से मोटी – तगड़ी होकर जब आऊंगी तब मुझे खा लेना । अब वो लोग मेरा इंतजार कर रहे होंगे , अब मैं उनसे अपना पीछा कैसे छुड़ाऊँगी इसी बात की मुझे चिंता है ।
थोड़ी देर सोचने के बाद बेटी ने कहा कि – तुम चिंता मत करो मां , मेरे पास एक उपाय है अगर तुम मेरे कहे अनुसार काम करोगी तो यह मुसीबत टल जाएगी ।
उसकी बेटी ने एक बड़ा सा गोल मटका खरीद लाया और नीचे की तरफ दो छोटे छेद कर दिए और ऊपर की तरफ भी दो छोटे छेद कर दिए और उसने अपनी मां को कहा कि- मां आप इस मटके में बैठ जाइए नीचे के हिस्से आप अपने दोनों पैर निकालकर धीरे धीरे चलना और सामने के छेद से आप रास्ता देख सकते हैं ।
जैसे ही वह आपके सामने आए आप रुक जाना और उनके चले जाने के बाद धीरे-धीरे आगे बढ़ना ऐसा कहकर बेटी ने अपनी मां को मटके के अंदर बिठाया और ढक्कन बांध दिया और घड़े को धकेलते हुए कहा – ”चल रे घड़ा घाटे – घाट “, ” चल रे घड़ा खाटे – घाट ” घड़ा धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए जंगल में आया थोड़ी देर में उसके सामने गुजरते हुए बाघ ने कहा – ए मटके तुमने एक बुढ़िया को देखा है क्या ? उसने कहा था मैं आऊंगी लेकिन आज तक नहीं आई ।
घड़े ने कहा – ” बुढ़िया देखे न गुड़िया ,” चल रे घड़ा घाटे – घाट , चल रे घड़ा घाटे – घाट ” और और घड़ा लुढ़कने लगी । थोड़ी ही दूर चलने पर उसका सामना भालू के साथ हुआ , भालू ने अपने लंबे बाल लहराते हुए और गुर्राते हुए कहा – ए मटकी तुमने एक बुढ़िया को देखा है क्या ?
मटकी से आवाज आई – ” बुढ़िया देखे ना गुड़िया , चल रे घड़ा घाटे – घाट ” और धीरे-धीरे वह आगे बढ़ गई ।
अंत में उसका सामना चीता के साथ हुआ चीता जोर से छलांग लगाकर उसके सामने आ गया और पूछा ऐ घड़े तुमने एक बुढ़िया को देखा है क्या ? जो लाठी टेककर चलती है , उसने कहा था कि मैं जल्दी ही आऊंगी लेकिन इतने दिन हो गए वह आज तक नहीं आई ।
मटके ने कहा – ” बुढ़िया देखे ना गुड़िया , चल रे घड़ा घाटे – घाट , चल रे घड़ा घाटे- घाट ” । ऐसा करते हुए बुढ़िया जंगल से पार हो गई । जंगल के बाहर आते ही मटका फोड़ कर बुढ़िया बाहर आ गई और खुशी से झूमने लगी और फिर वह अपने घर पहुंच गई ।
शिक्षा :- कितनी भी विपरीत परिस्थितियां हो हमें अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए तथा सदैव समस्याओं को हल करने के बारे में सोचना चाहिए ।

पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोककथा
पुरुषोत्तम साहू

New hindi story for kids । किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान

एक गांव में एक लड़का रहता था भोलाराम , तकरीबन 10 साल का , जैसा नाम वैसा ही काम , बहुत ही भोला – भाला और कमजोर बुद्धि का बालक , दुनिया की चतुराई से अनभिज्ञ । उसकी मां का निधन हो चुका था , उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी । उसकी सौतेली मां उसे अच्छे से संभालती थी । लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसकी सौतेली मां के बच्चे हुए । धीरे-धीरे उस सौतेली मां का व्यवहार बदलने लगा और वह उसे तरह-तरह से प्रताड़ित करने लगी लेकिन वह लड़का बहुत भोला-भाला था उसे यह बात समझ नहीं आती थी । वह अपनी मां के बताए अनुसार ही चलता था उसके मन में अपनी मां के प्रति कभी भी द्वेष की भावना नहीं आई । घर पर ही रहता था और अपनी मां के साथ और अपने पिता के साथ काम करने में मदद करता था ।

कुछ सालों बाद उसके बाकी के भाई – बहन बड़े हो गए और वह लड़का जवान हो गया था । अब उसकी शादी करने की उम्र हो चुकी थी , वह गोरा और गठीले बदन वाला एक नौजवान बन गया था । पिता ने जब उसकी मां के सामने भोलाराम के विवाह की बात की तो , सौतेली मां ने सोचा कि जब इसका विवाह हो जाएगा और इसका परिवार बस जाएगा तब आज नहीं तो कल इसे जायदाद में हिस्सा भी देना पड़ेगा । इसलिए उसने उसे मारने का षड्यंत्र रचा उसके पिता बहुत भोले – भाले थे और दिन भर खेतों में काम करते रहते थे । इसलिए उनको इस बात की भनक नहीं लगी ।

एक दिन उस सौतेली मां ने लड्डू और पूरी बनाएं और एक पोटली में पूड़ी और लड्डू बांध कर जंगल के रास्ते अपने मामा के घर संदेश पहुंचाने के लिए बहाने भोलाराम को भेजने का उपाय किया । षड्यंत्र के तहत उसकी मां ने उसके लड्डू में जहर मिला दिया था उसने लड़के से कहा कि तुम्हें जब रास्ते में भूख लगेगी तब तुम इसे खा लेना और आधी रोटी और लड्डू अपने मामा के घर ले जाना । लड़का अपनी मां की बात मानकर सुबह – सुबह ही नहा धोकर तैयार होकर पोटली लेकर अपने मामा के घर संदेशा पहुंचाने के नाम से घर से निकल पड़ा । चलते – चलते वह जंगल तक पहुंच गया । गर्मी का दिन था इसलिए उसे बहुत ज्यादा थकान लग रही थी ।

जब वह जंगल के बीच में पहुंचा तो वह बहुत ही थक चुका था । उसने सोचा कि यहां पर थोड़ी देर आराम कर लेते हैं । उसने एक छोटे झरने के किनारे बड़े से पत्थर पर अपनी पोटली रखी और पत्थर की खोह में आराम करने लगा थोड़ी देर बाद वहां एक हाथी आया । हाथी लड्डू की सुगंध पाकर पोटली के पास पहुंचा । हाथी ने सूंड से उस पोटली को खोल दिया और उसमें के लड्डू और पूड़ी खा लिए । इस बीच उस लड़के की नींद भी खुल गई और उसने देखा कि वह हाथी उसके खाने को बर्बाद कर रहा है , गुस्से में आकर उसने हाथी को मारना शुरू किया । हाथी ने उसे अपनी सूंड में लपेट लिया वह अपने मुट्ठी से उसके सिर पर बार – बार वार कर रहा था । उधर से राजा की सेना उस हाथी का पीछा करते हुए आ रहा था और जोर-जोर से चिल्ला रहे थे । उन्होंने देखा कि एक लड़का हाथी को कैसे मार रहा है , थोड़ी ही देर में वह हाथी जहर के प्रभाव से गिर पड़ा और थोड़ी ही देर में उसकी मृत्यु हो गई ।

सिपाही चिल्लाने लगे कि यह बहुत बलवान लड़का है ,जिसने अपने मुक्के के प्रहार से इस विशालकाय हाथी को मार दिया और वे नाचने लगे । सिपाहियों ने उस लड़के को बताया कि यह राज दरबार का हाथी है कुछ दिन पहले ही पागल हो गया और राज दरबार से भागकर लोगों को घायल कर रहा था । इसलिए हम इसे पकड़ने आए थे राजा ने इस हाथी को मारने के आदेश दिए हैं । इस हाथी ने लोगों को बहुत परेशान कर रखा था लेकिन तुमने इसे अपने बाहुबल से मार दिया , तुम बहुत महान हो ।

सिपाहियों ने कहा कि राजा बहुत खुश होंगे, तुम्हें बहुत सारे इनाम मिलेंगे , तुम अभी हमारे साथ चलो । लड़का सिपाहियों के साथ चला गया उसने सोचा कि मुझे इनाम में जो धन मिलेगा उसे मैं अपने घर में ले जाऊंगा तो मेरे माता और पिता बहुत ही खुश होंगे । सिपाहियों के साथ वह लड़का राजदरबार में पहुंचा । सिपाहियों ने सारी बात राजा को बता दी , राजा बहुत खुश हुए और उसे 100 सोने की स्वर्ण मुद्रा इनाम के रूप में प्रदान की ।

राजा ने पूछा कि तुम क्या काम करते हो ? लड़के ने कहा – मैं अपने पिता के साथ खेतों में काम करता हूं । राजा ने कहा – तुम बहुत बहादुर हो , तुम बहुत ही शक्तिशाली हो , तुम्हें हमारे दरबार में एक वीर योद्धा के रूप में होना चाहिए । लड़का यह सुनकर बहुत ही खुश हुआ और उसने राजा की बात मान ली और वहां पर सैनिक का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया । उसकी मेहनत को देखकर राजा ने उसे सेना की एक टुकड़ी का सेनापति बना दिया । इधर बहुत दिनों तक उस लड़के की कोई खोज – खबर नहीं थी । इसलिए उसके परिवार वालों ने उसे मृत मान लिया और उसकी सौतेली मां मन ही मन बहुत ही खुश होने लगी ।

थोड़े ही दिनों बाद एक शेर ने राजा के राज्य में उत्पात मचाना शुरू कर दिया और लोगों को मारना शुरू कर दिया । राजा ने तुरंत ही अपनी सेनाओं के सेनापतियों को आदेश दिया कि उस शेर को ढूंढ कर मार दिया जाए । भोलाराम भी अपनी टुकड़ी के साथ उस शेर को पकड़ने के लिए जंगल में छान मारने लगा । एक दिन जब वह अपनी सेना के साथ शेर को ढूंढ रहा था तब उसी जंगल में एक किसान मिला । किसान ने उससे कहा कि – सेनापति जी मेरा एक बैल घर से भागकर घने जंगल में आ गया है , मैं उसे तलाश करते -करते थक गया हूं । अगर आप लोगों को वह बैल मिल जाए तो उसे आप अपने पास रख लीजिएगा और मेरे गांव में मुझे सूचना भिजवा दीजिएगा ।

सेनापति ने किसान से कहा कि – आप चिंता मत करिए अगर वह बैल हमको मिला तो हम उसे अवश्य ही आप तक पहुंचा देंगे , अब आप अपने घर चले जाइए अकेले जंगल में भटकना ठीक नहीं है । रात होने पर वे पेड़ों के ऊपर सो जाते थे और कुछ सैनिक नीचे तंबू बनाकर निगरानी करते थे । उसी दिन रात को सेनापति को एहसास हुआ कि , कोई जानवर उसके पेड़ के नीचे खड़ा है , उसने ध्यान से देखा और कहा अरे यह तो किसान का बैल है । रस्सी का फंदा लेकर भोलाराम ने उसके ऊपर छलांग लगा दी और उसकी गर्दन को रस्सी से लपेट दिया सभी सैनिक भी उसके पीछे-पीछे उस पर टूट पड़े । रात के अंधेरे में भगदड़ मच गई सैनिकों ने बड़े – बड़े जाल फेंक कर उसको पकड़ लिया ।

सभी सैनिकों ने मशाल जलाई तब उस लड़के ने देखा , अरे यह तो खूंखार शेर है ! उसकी बोलती बंद हो गई लेकिन सारे सैनिक उसकी जय-जयकार करने लगे । शेर को पिंजरे में कैद कर राजा के पास लाया गया । भोलाराम के इस कारनामे को देखकर राजा अत्यंत ही प्रसन्न हुए , उन्होंने उसे अपने राज्य का मुख्य सेनापति घोषित कर दिया । उसकी बहादुरी को देख कर अतिसुन्दर राजकुमारी इतनी प्रसन्न हुई कि उन्होंने उससे विवाह करने की घोषणा कर दी ।

राजा ने भी खुश होकर उनके विवाह को मंजूरी दे दी । इस तरह राजकीय ठाठ – बाठ से उसका विवाह संपन्न हुआ । वह अपनी नई – नवेली दुल्हन को लेकर सैनिकों के बेड़े के साथ अपने गांव की ओर रवाना हुआ । उसके गांव के लोग उसे देखकर हक्के – बक्के रह गए । जब वह अपने घर के पास जाकर खड़ा हुआ तो उसकी मां और पिताजी उसको देखकर सन्न रह गए । सौतेली मां के पैरों तले तो मानों जमीन ही खिसक गई ।

उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला । लड़के ने अपनी सारी बात अपने परिवार वालों की बताई और कहा कि आज से हम राज महल में रहेंगे , मैं आप सबको लेने के लिए आया हूं । यह बात सुनकर उसकी सौतेली मां को मन ही मन बहुत पश्चाताप हुआ और अपने आपको कोसने लगी और खूब रोई , उसने उसके साथ राजमहल जाने के लिए इंकार कर दिया । लेकिन उस लड़के की बार-बार जिद करने पर वह जाने के लिए मान गई और उसके बाद उसने कभी भी उस लड़के और उसकी पत्नी के बारे में कभी भी अपने मन में बुरे विचार नहीं लाएं इस तरह सभी लोग राजमहल में हंसी – खुशी रहने लगे ।

पारंपरिक लोककथा
पुरुषोत्तम साहू

बच्चों की लघु हिंदी कहानियाँ

1 पड़ोसन का बर्तन

                                  एक बार एक औरत ने अपनी पड़ोसन से एक बर्तन उधार मांगा और दूसरे दिन उसने एक अन्य छोटे से बर्तन के साथ वह बर्तन वापस कर दिया । पड़ोसन को आश्चर्य हुआ उसने उससे पूछा कि , वह छोटा बर्तन कहां से आया  ? औरत ने जवाब दिया – तुम्हारे बड़े बर्तन ने छोटे बर्तन को जन्म दिया है । उस औरत ने सोचा कि उसकी पड़ोसन का दिमाग घूम गया है , उसने उसे कुछ नहीं कहा । क्योंकि वह एक और बर्तन पाकर बहुत खुश थी । 

                                  कुछ दिनों बाद पड़ोसन बर्तन फिर उधर मांगा । मगर इस बार उसने बर्तन अपनी पड़ोसन को वापस नहीं किया । सहेली के बर्तन वापस मांगने पर उसने कहा –  बर्तन  ! तुम्हारा बर्तन मर गया है । पड़ोसन ने हंसकर उससे पूछा कि बर्तन कैसे मर सकता है ? इस पर उस औरत ने बड़ी चतुराई से कहा – अगर तुम्हारा बर्तन , दूसरे बर्तन को जन्म दे सकता है तो , मर भी सकता है । यह सुनकर पड़ोसन दंग रह गई । मगर अब उस पड़ोसन के पास बर्तन को खो देने के अलावा कोई दूसरा चुनाव नहीं था । 

                                  अनेकों बार हम छोटे से लाभ के लिए अपने आप को मुसीबतों में डाल लेते हैं । अतः हमें तात्कालिक लाभ नहीं देखते हुए किसी विषय पर विस्तार पूर्वक सोचना चाहिए, कि क्या गलत है और क्या सही या ।               

2 कंजूस मित्र

                                  श्याम सुंदर नाम का एक नवयुवक रायपुर शहर में रहता था और एक कंपनी में नौकरी करता था । उसके गाँव केे मित्र जब काम के सिलसिले में शहर आते तो उसके घर जरूर आते ।एक बार मनोहर लाल नाम का एक मित्र उसके घर आया ।मित्र को देखकर श्याम भौहें सिकोड़ने लगा । यह सब देखकर उसकी पत्नी ने कारण पूछा। उसने अपनी पत्नी को कहा कि यह मेरा मित्र बहुत ही कंजूस है , जब भी आता मुझसे खूब खर्चे करवाता है ।किन्तु अपने जेब से एक फूटी कौड़ी कभी नहीं निकालता । यह सुनकर उसकी पत्नी ने कहा कि आप फिक्र न करें ,मैं आपको एक उपाय बताती हूँ ।

                                 अब श्याम सुंदर अपने कंजूस मित्र को लेकर शहर भ्रमण के लिए निकल गया । वह मित्र उसकी कंजूसी से तंग आ चुका था । इस बार उस मित्र ने उसे सबक सिखाने का सोचा । वह अपने कंजूस मित्र को बाजार ले गया और कहा आपको जो भी खाने की इच्छा है बता सकते हैं , मैं आपके लिए ले दूंगा । 

                               वो एक होटल में गए श्याम ने होटल मालिक से पूछा – भोजन कैसा है ? होटल के मालिक ने जवाब दिया मिठाई की तरह स्वादिष्ट है महाशय । मित्र ने कहा तो चलो मिठाई ही लेते हैं । दोनों मिठाई की दुकान पर गए , मित्र ने पूछा – मिठाइयां कैसी है ? मिठाई बेचने वाले ने जवाब दिया – मधु (शहद ) की तरह मीठी है । श्याम ने कहा तो चलो मधु ही ले लेते हैं । श्याम कंजूस मित्र को शहद बेचने वाले के पास ले गया । उसने शहद बेचने वाले से पूछा – शहद कैसा है ? शहद बेचने वाले ने जवाब दिया – जल की तरह शुद्ध  है ।

                               तब श्याम ने मनोहर से कहा – मैं तुम्हें सबसे शुद्ध भोजन दूंगा । उसने कंजूस मित्र को भोजन के स्थान पर पानी से भरे हुए अनेक घड़े प्रदान किए । कंजूस मित्र को अपनी गलती का अहसास हो गया , वह समझ गया कि यह सब उसे सबक सिखाने के लिए किया जा रहा है । उसने हाथ जोड़कर श्याम से माफी मांगी , श्याम ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया । दोनों हँसी – खुशी वापस घर आए । श्याम की पत्नी ने मनोहर के लिए स्वादिष्ट भोजन तैयार किया । भोजन उपरांत वह वापस गांव लौट आया ।इसके बाद उसने अपनी कंजूसी की आदत हमेशा के लिए छोड़ दी ।

3 नेकी की राह

                                   शीत ऋतु अपने चरम पर थी । चारों ओर पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ एक सुंदर सा गाँव था । वहाँ एक छोटी लड़की रहती थी । उसे अपने सहेली के घर जाने की इच्छा हुई । वह अपने हाथ में सिर्फ एक रोटी का टुकड़ा लेकर घर से चली , उसने सड़क के किनारे एक बूढ़े को देखा । मैं भूखा हूं ,उसने कहा मुझे कुछ खाने को दो ! लड़की ने उसे रोटी का टुकड़ा दे दिया । वृद्ध ने अपने दोनों हाथ उठाकर उसे आशीर्वाद दिया ।

                                  थोड़ा आगे जाने पर उसे एक छोटा बच्चा मिला , बच्चे ने लड़की से प्रार्थना कि मुझे ओढ़ने के लिए कुछ दो । लड़की ने थोड़ी देर सोचने के बाद झटपट अपना साल निकालकर उसे दे दिया । थोड़ा आगे गई एक बच्चा ठंड से कांप रहा था ,लड़की को उस पर दया आ गई । उसने अपनी मफलर से बच्चे को ढक दिया । थोड़ा आगे चलने के बाद अब वह खुद सर्दी से काँपने लगी ,वह एक पेड़ के नीचे दुबक कर बैठ गई ।

                                 अगले ही पल उसने तारों को आसमान से नीचे गिरते देखा । उसने जब गौर से देखा तो वे सोने के सिक्के थे ,उसका शरीर सुंदर कपड़े से ढक गया , उसके पैरों में जूते थे ,गले में मफलर थी । उसके सामने एक सुंदर सी टोकरी थी , जो फलों और मिठाइयों से भरी हुई थी । भगवान ने उसकी दयालुता के लिए उसे आशीर्वाद और इनाम दिया था ।

4 चूहा और सूरज 

                               एक बार एक छोटा लड़का जो बर्फ से ढकी पहाड़ी पर रहता था । 1 दिन के लिए नीचे मैदान में आया मैदान में बहुत गर्मी थी । लड़के ने सुंदर फरो का गर्म कोट पहना था । सूरज की गर्मी के कारण उसका ठंड भाग गया । उसने अपना गर्म कोट उतार कर फेंक दिया किन्तु कुछ ही देर में उसका शरीर पसीने से तरबतर हो गया ।

                               उसे सूरज पर बड़ा गुस्सा आया । सूरज का कोई उपयोग नहीं है ,लड़के ने सोचा । वह लड़का बहुत क्रोधित हुआ तथा उसने सूरज को दंड देने का फैसला किया । वह एक तांत्रिक के पास गया और उसे एक जाल बनाने को कहा । अगली सुबह वह पहाड़ी की चोटी पर गया और जैसे ही सूरज ऊपर आया उसने उसे जाल में पकड़ लिया । उस दिन सूर्य उदय नहीं हुआ और जानवर अपने भोजन के लिए नहीं जा सके, उन्होंने देखा कि सूरज जाल में फंसा है ।

                                  तब उन्होंने चूहे को मना बुझा कर जाल काटने भेजा और उस समय चूहा बहुत बड़ा होता था । चूहे ने जाल को अपनी तेज दाँतो से काट दिया और सूरज को आजाद किया । सभी जानवर खुश हो गए लेकिन चूहा सूरज की गर्मी के कारण बहुत छोटा हो गया । यही कारण है कि चूहा अब भी बहुत छोटा है । 

5 घमंडी पर्वत 

                                    एक जंगल में एक विशाल पर्वत था । एक दिन उस विशाल पर्वत ने जानवरों को देखा , जंगल को देखा और फिर खुद को देखा । उसे अपने आकार पर बहुत घमंड हुआ उसने कहा मैं सबसे शक्तिशाली हूं , मैं ही तुम्हारा ईश्वर हूँ । पर्वत की यह बातें सुनकर सभी जानवरों को बहुत गुस्सा आया । घोड़े ने आगे बढ़कर कहा – ओ घमंडी पर्वत अपने आप पर इतना घमंड मत कर  । एक क्षण में तुम्हें दौड़ कर पार कर सकता हूं , पर घोड़ा लड़घड़ा कर गिर गया ।

                                  पर्वत दिल खोलकर हंसा , इसी तरह हाथी ,ऊँट ,जिराफ सभी ने कोशिश की पर वे पहाड़ का कुछ बिगाड़ नहीं पाए अब सभी जानवरों को अपना दोस्त चूहा याद आया । चूहा पर्वत के पास आया और उसने पर्वत को चुनौती दी । पर्वत ने चूहे का खूब मजाक उड़ाया । चूहे ने मुस्कुराते हुवे पर्वत में छेद बनाना प्रारंभ किया । अन्य चूहों ने भी पर्वत में छेद करना चालू कर दिया । पर्वत घबरा गया उसने सभी जानवरों से माफी मांगी । इस तरह पर्वत के घमंड को एक छोटे से चूहे ने तोड़ दिया 

6 प्रेम का रिश्ता

                                    एक बार तीन वृद्ध पुरूषों ने एक घर के बाहर रात में आसरा लिया। एक महिला अपने घर से बाहर निकली उसने तीनों वृद्ध लोगों को देखा । महिला ने कहा मैं आप लोगों को जानती तो नहीं किंतु मैं सोचती हूं कि आप भूखे हैं ! 

                                  कृपया अंदर आए और कुछ खा ले । वृद्धों ने कहा हम तीनों साथ – साथ कभी किसी घर में नहीं जाते । महिला ने जानना चाहा ऐसा क्यों  ? एक वृद्ध ने समझाया मेरा नाम प्रेम है , दूसरे का नाम सफलता और तीसरे का नाम संपत्ति है । उसने आगे कहा अब आप अपने परिवार के लोगों से पूछ ले कि हम में से आप किसे अंदर बुलाना चाहेंगे ।

                                 महिला ने अंदर जाकर अपने पति से बात कि उसने कहा – हम सब संपत्ति को बुलाते हैं ; उसकी पत्नी ने असहमति जाहिर की तथा कहा – क्यों ना हम सफलता को बुलाएं  ? अंत में उनकी बेटी ने सलाह दी क्या प्रेम को बुलाना ज्यादा उचित नहीं होगा ? दोनों ने ही अपनी बेटी की इच्छा का मान रखते हुए हामी भर दी ।

                          उन्होंने प्रेम कौन है ? कहकर पुकारते हुए , उसे अंदर आने का आग्रह किया । जैसे ही प्रेम ने घर में प्रवेश किया संपत्ति और सफलता भी उसके पीछे – पीछे घर में आ गए ।  प्रेम ने मुस्कुराते हुए परिवार को कारण समझाया कि जहां प्रेम होता है , वहां सफलता और संपत्ति भी अपने आप आ जाते हैं । परंतु यदि आप संपत्ति या सफलता को बुलाते तो मैं उनके पीछे नहीं आता । जिनके परिवार में प्रेम, और शान्ति होती हैं , उन्हें सफलता और संपत्ति जरूर प्राप्त होता है ।

7 खारा समुन्दर

                               एक बार एक गांव में दो भाई रहते थे । बड़े भाई के पास एक साधू द्वारा दिया गया एक बर्तन था । वह एक जादूई बर्तन था , जो अपने मालिक की सारी इच्छाएं पूरी चलता था । बड़ा भाई जो कुछ माँगता ,बर्तन उसकी सारी जरुरते पूरी करता था । छोटे भाई को बड़े भाई से जलन होने लगी एक रात वह जादुई बर्तन को चुरा कर , एक नाव में सवार होकर समुद्र के रास्ते भाग निकला ।

                                उसने बर्तन से जो कुछ भी माँगा जादुई बर्तन ने उसे दिया । आखिर उसे रास्ते में भूख लगी जादूई बर्तन ने लजीज व्यंजनों की थाली उसके सामने रख दी । जब उसने खाना शुरू किया भोजन में नमक कम था । उसने बर्तन से नमक की मांग की, बर्तन से नमक निकलना शुरू हुआ लेकिन नमक निकलता ही रहा, बंद करने का मंत्र उसे नहीं आता था ।

                              नाव में नमक भर गया और समुद्र में डूब गया ।कहते हैं आज भी उस बर्तन से नमक निकल रहा है इसलिए समुन्दर का पानी खारा होता है ।

8 पिंजरे का बंदर 

                               एक समय की बात है एक शरीफ आदमी था । उसके पास एक बंदर था ,वह बंदर के जरिए अपनी आजीविका कमाता था । बंदर कई तरह के करतब लोगों को दिखाता था । लोग उस पर पैसे फेंकते थे , जिसे बंदर इकट्ठा करके अपने मालिक को दे देता था । एक दिन मालिक बंदर को चिड़ियाघर लेकर गया ,बंदर ने वहां पिंजरे में एक और बंदर देखा । लोग उसे देख – देख कर खुश हो रहे थे तथा उसे खाने को फल बिस्किट इत्यादि दे रहे थे । बंदर ने सोचा कि पिंजरे में रहकर भी यह बंदर कितना भाग्यवान है, बिना किसी परिश्रम के ही इसे खाना-पीना मिल जाता है ।

                            उस रात वह बंदर भी भाग कर चिड़ियाघर में रहने पहुंच गया , उसे मुफ्त का खाना और आराम बहुत अच्छा लगा । पर कुछ दिनों में ही बंदर का मन भर गया । उसे अपनी स्वतंत्रता की याद आने लगी, अपनी  आजादी वापस चाहता था । वह फिर चिड़ियाघर से भाग कर अपने मालिक के पास पहुंच गया । उसे मालूम हो गया की रोटी कमाना कठिन होता है , किंतु आश्रित होकर पिंजरे में कैद रहना उससे भी कठिन है । अपने पौरुष से ही मनुष्य की महानता है ,मुफ्त की चीजें लोगों को निक्कमी बना देती है । 

                   ” जिंदगी तो अपने दम पर जिया जाता है यारों , दूसरों के कांधों पर तो सिर्फ जनाजे निकलते हैं ।”

9 बोलती हुई गुफा 

                               बहुत दिनों की बात है ,जंगल की एक गुफा में शालू नाम का सियार रहता था । वह खाने की तलाश में दिन में बाहर जाता और रात को वापस आता । उसी जंगल में एक बूढ़ा और कमजोर शेर रहता था । एक दिन शेर शिकार कि तलाश में गुफा के पास पहुंचा ।

                              शेर ने कहा – अवश्य ही यहां कोई जानवर रहता होगा मैं उसका इंतजार करता हूं यार रात को लौटा उसने सी के पैरों के निशान देखी सियार में जोर से पुकारा मेरी प्यारी गुफा क्या मैं अंदर आ सकता हूं भूखा था उसे लगा शायद गुफा सियार से रोज बात करती हे सीने कहा हां अंदर आ जाओ सी की दहाड़ सुनकर सियार वहां से भाग गया और अपनी जान बचाई 

10 एक बिल्ली स्वर्ग में 

                         एक समय की बात है कि , मृत्यु के पश्चात एक बिल्ली स्वर्ग में पहुंचा । ईश्वर ने उसका स्वागत किया और कहा तुम कोई एक इच्छा कर सकती हो ,जो मैं पूरी करूंगा । बिल्ली ने कहा वह एक आरामदायक पलंग चाहती है , जहां कोई तंग ना करें ।

                        ईश्वर ने उसकी प्राथना स्वीकार की , कुछ दिनों पश्चात  कुछ चूहे मर गए वे भी स्वर्ग पहुंची । ईश्वर ने उन्हें भी एक वरदान मांगने को कहा । चूहोे ने पहिए वाली जूतों की मांग की जिससे वे भी स्वर्ग में तेज गति से इधर – उधर घूम सके । ईश्वर ने उनकी इच्छा पूरी की । कुछ दिनों पश्चात ईश्वर ने बुल्ली से पूछा – तुम्हें स्वर्ग में कैसा लग रहा है ? बिल्ली ने उत्तर दिया – बहुत अच्छा सबसे अच्छी लगी आप की पहियों पर भोजन व्यवस्था ।

एकता का बल हिंदी कहानी

                                                                                                                           नमस्कार साथियों आज मैं आपको हिंदी की एक रोचक कहानी ” एकता का बल ”  के बारे में बताने जा रहा हूं , जिसे पढ़कर आपको बहुत ही आनंद आएगा ।

                 एक जंगल में एक चूहा और एक कबूतर रहता था , दोनों बहुत अच्छे मित्र थे । कबूतर और चूहे की दोस्ती को देखकर किसी को भी समझ नहीं आता था कि , एक  जमीन के अंदर रहता है और दूसरा पेड़ के ऊपर । फिर भी इन दोनों में इतनी गहरी दोस्ती कैसे है  । यह देख कर एक दिन एक कौवा उनके पास जाता है , और कहता है कि , आप लोग मुझे भी अपना दोस्त बना लो ।मैं आप लोगों को बहुत पसंद करता हूं , और मैं आपके सहयोग के लिए हमेशा तैयार रहूंगा ।
                         यह बात सुनकर चूहे ने कहा कि कौवा और चूहे की  दुश्मनी तो आदि – अनादि काल से चली आ रही है । भला चूहे की दोस्ती कौंवे से कैसे हो सकती है । कौवा, चूहे का जानी दुश्मन होता है , हम तुम पर कैसे विश्वास कर ले । यह बात सुनकर कौवा गिड़गिड़ाने लगा कि अगर तुम लोगों ने मुझे अपना दोस्त नहीं बनाया तो मैं , बिना कुछ खाए पीए ही अपने प्राण त्याग दूंगा । कौवे के बहुत मनाने और बार बार विश्वास दिलाने पर कबूतर ने कहा कि चलो एक बार हम इसका विश्वास कर लेते हैं , और इसे अपना दोस्त बना लेते हैं । इस तरह कौवा , कबूतर और चूहा तीनों दोस्त बन गए ।
                    दिन यूं ही बीतते गए और उन्होंने देखा कि कौवा एक बहुत अच्छा दोस्त है , और हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार रहता है , कौवा सच्चा था , वह अपने दोस्तों को बेइंतहा प्यार करता था , तीनों दोस्त एक साथ मजे से रहते थे तथा सुख दुख में एक – दूसरे का साथ देते थे । कुछ समय पश्चात उस जगह पर भयानक अकाल पड़ा नदी – नाले सूखने लगे , पेड़-पौधे , घास सभी सूखने लगे ,और जंगल में खाने की बहुत किल्लत हो गई ।
                                                                         कौवे ने कहा कि दोस्तों अब यहां पर रहना उचित नहीं है , यहां पर रहेंगे तो भूख से मर जाएंगे । यहां से बहुत दूर दूसरा जंगल है , जहां पर मेरा एक दोस्त है और वहां का जंगल हरा-भरा है , वहां पर खाने की खूब सारी चीजें हैं , हम लोगों को वहां पर जाना चाहिए । वहां पर हमारी मदद के लिए मेरा दोस्त हमेशा तैयार रहता है,  पहले तो कबूतर और चूहे को यह उपाय अच्छा नहीं लगा लेकिन बाद में सोच कर उन्होंने कौवे की बात मान ली और तीनों जंगल के लिए रवाना हो गए । कौवा चूहे को अपने चोंच में दबा कर उड़ने लगा और साथ में कबूतर भी उड़ने लगा । वे लोग बड़ी सावधानी से आगे बढ़ने लगे , दूसरे जंगल में पहुंचने के बाद उन्होंने देखा कि यह जंगल तो वाकई बहुत हरा-भरा है , और यहां खाने का भंडार है । कौवा एक तालाब के किनारे उतर गया और चूहे को भी नीचे उतार दिया । कबूतर भी कौवा के पास आकर उतर गया , फिर कौवे ने अपने दोस्त को जोर – जोर से आवाज लगाई ।
                           तालाब से निकल कर उनके पास एक बड़ा सा कछुवा आया और उसने कौवे से कहा –  मेरे दोस्त तुम कितने दिन बाद आए हो , कहो तुम कैसे हो ? सब कुशल मंगल तो है ना ? तो कौवे ने सारी बात अपने दोस्त को बता दी । चारों दोस्त उस नदी के किनारे हंसी –  खुशी रहने लगे । कुछ दिन बाद जब यह चारों तालाब के किनारे बैठ कर बातें कर रहे थे , तभी एक हिरण भागते – भागते उनके पास आया , हिरण  हाँफ रहा था , उसकी साँसे फुली हुई  थी । कौंवे ने कहा ओ भाई हिरन कहां  चले जा रहे हो तुम इतना डर क्यों रहे हो ? तब हिरन ने कहा क्या तुम कुछ जानते हो बहुत बड़ी कठिनाई आने वाली है । यहां पर कुछ दूर नदी के किनारे एक राजा ने अपना डेरा लगाया है , इस राजा के सैनिक बहुत ही क्रूर और अत्याचारी है । कल वे इधर हि शिकार के लिए आयेंगे । उनके सामने जो भी आता है , उन्हें वो नष्ट कर देते हैं । अगर अपनी जान बचाना चाहते हो तो तुरंत यहां से भाग जाओ ! क्योंकि वे लोग कल सुबह ही शिकार के लिए निकल जायेंगे , हमारे पास समय बहुत कम है। यह बात सुनकर सभी परेशान हो गए और चारों  दोस्तों ने हिरण के साथ कही दूर चले जाने का निश्चय किया ।
               अब पांचों जानवर दौड़ते-दौड़ते दूसरी जगह पर जाने लगे चूंकि कछुवा बहुत बड़ा था और वह जमीन पर रेंगता है , इसलिए सभी धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे । कुछ दूर जाने के बाद एक शिकारी की नजर उस कछुवे पर पड़ गई , शिकारी दौड़ते हुए उसके पास आया । हिरन भाग गई कौवा और कबूतर पेड़ पर चढ़ गयें , चूहा बिल में घुस गया । लेकिन कछुवा कुछ ना कर पाया और उसे शिकारी ने पकड़ लिया और अपनी जाल में भरकर चलने लगा । यह देख कर सभी दोस्त बहुत परेशान हो गए और सोचने लगे कि कैसे इस संकट से छुटकारा पाया जाए और अपने दोस्त की जान बचा जाये ।उन्होंने एक तरकीब निकाली ।
                     जैसे ही नदी के किनारे शिकारी ने जाल को नीचे रखा और खुद हाथ मुंह धोने के लिए नदी के नीचे उतरा वहीं पर कुछ दूर हिरन जमीन पर लेट गई और मरने का नाटक करने लगी । इतने में कौवा आया और हिरण पर चोंच मारने लगा । यह देख कर शिकारी ने सोचा कि यह हिरन अभी-अभी मरी होगी , उसका माँस अभी ताजा होगा । उसने उसे उठाने के नियत से उसके पास गया तभी बिल से चूहा बाहर आया और उसने कछुवे के जाल को काट दिया । कछुवा जल्दी से निकलकर तुरंत ही नदी में कूद गया और उसकी गहराइयों में गायब हो गया । चूहा बिल में घुस गया हिरन के नजदीक आते ही कौवा उड़ गया और हिरण भी तेज दौड़ लगाते हुए जंगलों में छिप गई । इस तरह सभी साथियों ने हिम्मत और बहादुरी के साथ काम करके , एकता से रहकर उन्होंने सबकी जान बचा ली। सभी साथी फिर से एक बार अपने गंतव्य के लिए निकल पड़े।
           इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि , अगर एकता के साथ काम किया जाए तो बड़ी से बड़ी कठिनाई भी आसानी से हल हो जाती है ।
 
साथियों आपको यह पोस्ट कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताये ।
धन्यवाद