💐वीर सपूतों को प्रणाम💐

वीर सपूतों को प्रणाम

मेरे देश के वीर सपूतों की दुल्हन,
बड़े अरमाँ से माथे पर बिंदी सजाए बैठे थे।
जोड़ा सुहाग का पहनकर टकटकी लगाए,
हाथों पे मेंहदी,पाँव पे माहुर रचाये बैठे थे

मेरे देश के वीर सपूतों की जननी,
आँचल फैलाये अपने आँगन से झाँक रहे थे
मेरा लाडला घर वापस कब आयेगा?
आँगन, गली ,बस्ती में ताक रहे थे।।

मेरे देश के वीर सपूतों के जनक,
सीना चौड़ा कर अपने लाल की राह तक रहे थे
बहना रक्षासूत्र बांधने भाई की कलाई ढूंढ रहे थे
भ्राता अपने भाई से मिलाप करने आतुर हुए,
सखा अपने मित्र के लिए बाट जोह रहे थे

तभी बीहड़ों में छुपे बैठे गिद्ध जानवरों ने,
अचानक जवानों पर हमला बोला
देख इनकी क्रूरता और कायरता,
हमारे वीर जवानों ने मोर्चा खोला

धाय-धाय-धाय-धाय चहुँओर बीहड़ों में,
दोनों तरफ से सरबस चली गोलियाँ
वीर सपूतों के मुखारविन्द से निकली,
भारत माता की जय, जय हिंद की बोलियाँ

निर्लज्ज, दुष्ट दानवों को तनिक भी लाज न आई
उनका भी होगा घर-परिवार,ज़रा सी न सकुचाई
दुष्ट दानवों का संहार कर दिखाओ देवरूप कन्हाई
फ़िर जन्म लो, आओ कलयुगी धरती पर
चाहे श्रीकृष्ण रूप या आओ बनकर रघुराई

बीहड़ो के मंजर देख कह उठा हिंदुस्तान
पीठ पीछे वार करता है भीरू-कायरों
दम है तो सामने आ और कर मुकाबला,
देख करतब दिखाते यहाँ के एक-एक जवान।

देश के उन वीर सपूतों को शत शत नमन
जिन्होंने देश की ख़ातिर सर्वस्व न्यौछावर कर गया
देश की सुख-शांति , सुरक्षा ख़ातिर
ये अमर जवान खुद को शहीद कर गया।।
उन माता पिता को भी शत शत नमन,
जिन्होंने अपने घर का चिराग देश के नाम कर गया।।

नक्सल हमले में शहीद वीर सपूतों को भावभिनी श्रद्धांजलि एवं शत शत नमन💐💐🙏🙏🙏🙏

——-महेंद्र कुमार साहू खलारी ,गुंडरदेही बालोद छ.ग.

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